12 अगस्त को सावन अमावस्या के दिन पूर्ण सूर्यग्रहण, मुजफ्फरपुर में दिखने का समय और सूतक काल के नियम
Shravan Amavasya Grahan: 12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या पर पूर्ण सूर्यग्रहण लगेगा, जो 1999 के बाद का सबसे बड़ा होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा ...और पढ़ें

सावन अमावस्या पर होने जा रही खास खगोलीय घटना ने इसे और स्पेशल बना दिया है। (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Surya Grahan Timing In India: सनातन में आस्था रखने वालों के लिए सावन विशेष माह है। यह भगवान शंकर की पूजा-अर्चना से सीधे जुड़ा है। इस वर्ष सावन अमावस्या पर होने जा रही खास खगोलीय घटना ने इसे और स्पेशल बना दिया है।
अमावस्या पर ग्रहण
12 अगस्त 2026 को श्रावण मास की अमावस्या तिथि यानी बुधवार को खग्रास सूर्यग्रहण लगेगा। यह इस वर्ष का दूसरा सूर्यग्रहण होगा, लेकिन 1999 के बाद का पहला सबसे बड़ा 'पूर्ण सूर्यग्रहण' (Total Solar Eclipse) है। यह वैज्ञानिक, ज्योतिषीय और धार्मिक तीनों ही दृष्टिकोणों से दुनिया भर में विशेष मानी जा रही है।
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सम्मोहक खगोलीय घटना
पूर्ण सूर्यग्रहण तब घटित होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य की रोशनी को पूरी तरह से ढक लेता है। इस दौरान कुछ ही मिनटों में दिन के उजाले में पूरी तरह अंधेरा छा जाता है।
तापमान गिरता है और पक्षी शांत हो जाते हैं। इस स्थिति में सूर्य का बाहरी आभामंडल (कोरोना) बेहद स्पष्ट और सम्मोहक नजर आने लगता है।
इन देशों में दृश्यता
यह सूर्यग्रहण पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल के क्षेत्रों में पूर्ण रूप से दृश्यमान होगा।
इसके साथ ही उत्तरी अटलांटिक महासागर और उत्तरी प्रशांत महासागर के विस्तृत इलाकों में भी यह खगोलीय नजारा दिखाई देगा। ब्रिटेन सहित पूरे यूरोप महाद्वीप में आंशिक सूर्यग्रहण का लुत्फ उठाया जा सकेगा।
भारत में क्या रहेगी स्थिति
इस बारे में ज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक चतुर्वेदी ने बताया कि भारतीय मानक समय के अनुसार 12 अगस्त की रात 9 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा। इसके बाद देर रात 2 बजकर 28 मिनट तक यह खगोलीय प्रक्रिया चलती रहेगी।
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भारत में दृश्यता
भारत इसके मुख्य पथ (August 2026 Solar Eclipse Path) से बाहर है, इसलिए यह देश में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। भारत में रात का समय होने के कारण सूर्य पूरी तरह से ढका हुआ नजर नहीं आएगा।

सूतक काल के नियम
पं. अभिषेक कहते हैं कि मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण का सूतक काल (Solar Eclipse Sutak Kaal Timing) केवल उसी स्थान पर मान्य होता है जहां ग्रहण दिखता हो। यह ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल के कोई भी नियम लागू नहीं होंगे। भक्त बिना किसी संशय या धार्मिक पाबंदी के अपनी सामान्य दिनचर्या और पूजा-पाठ जारी रख सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए
भारत में ग्रहण का कोई दृश्य प्रभाव नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। इस दौरान भोजन करने, जल पीने या बाहर निकलने पर कोई सख्त धार्मिक रोक लागू नहीं होगी। हालांकि मन की शांति के लिए बुजुर्ग 'ऊं नमः शिवाय' या 'गायत्री मंत्र' का जप किया जा सकता है।
सावन में विशेष महत्व
यह खगोलीय घटना सावन (श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को घटित हो रही है। भगवान शिव की भक्ति के पवित्र महीने में पड़ने के कारण इस दिन दान-पुण्य और शिव आराधना का विशेष फल मिलता है। रात्रि में ग्रहण अवधि के दौरान 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करना साधकों के लिए अत्यधिक शुभ और हितकारी माना गया है।
अगला सूर्यग्रहण 2027
12 अगस्त 2026 के इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के ठीक एक वर्ष बाद पुनः एक बड़ा पूर्ण सूर्यग्रहण देखने को मिलेगा। 2 अगस्त 2027 को लगने वाला अगला सूर्यग्रहण दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के देशों से होकर गुजरेगा। अंधकार की समयावधि के लिहाज से 2027 का यह ग्रहण 2026 की तुलना में भी अधिक लंबा और विशेष रहने वाला है।