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मुजफ्फरपुर में 3.5 लाख का कर्ज 6 लाख हुआ, मशरूम भी नहीं मिला, अब समाधान की राह ताक रहीं जीविका दीदियां

Published: Tue, 08 Sep 2026 12:37 PM (IST)

मुजफ्फरपुर में मशरूम उत्पादन के नाम पर जीविका दीदियों को 3.5 लाख का कर्ज दिया गया, जो अब 6 लाख ...और पढ़ें

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

इसमें एआई जनरेटेड तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. मशरूम उत्पादन के नाम पर जीविका दीदियों से ठगी।

  2. साढ़े तीन लाख का कर्ज बढ़कर छह लाख हो गया।

  3. डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । मशरूम उत्पादन के नामपर ठगी गईं जीविका दीदियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के चंगुल में फंसकर कर्ज में डूबीं करीब सौ जीविका दीदियां अब कभी भी अप्रिय कदम उठा सकती हैं।

कर्ज की राशि लौटा पाने में असमर्थ इन दीदियों के सामूहिक रूप से इस संबंध में दिए आवेदन ने सनसनी फैला दी है। दीदियों ने इसके लिए एजेंसी जक्ष ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी के प्रबंध निदेशक आशुतोष मंगलम, जीविका डीपीएम, संबंधित बैंक को जिम्मेदारी बताया है।

डीएम कुमार गौरव ने डीडीसी निशांत सिहारा को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। मामले की एक सुनवाई एसडीओ पूर्वी के कोर्ट में पहले से चल रही है।

विदित हो कि जिले के मुशहरी और बोचहां में सौ जीविका दीदियों को लखपति बनाने के लक्ष्य के साथ मशरूम उत्पादन के लिए 3.5-3.5 लाख रुपये के ऋण दिए गए।

तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एजेंसी की ओर से मशरूम उत्पादन के लिए स्मार्ट हट भी नहीं दिया गया। अब यह कर्ज प्रति दीदी छह-छह लाख हो गया है। जबकि एक भी दीदी ने लोन राशि का उपयोग भी नहीं किया।

सादे पेपर पर अंगूठा और दस्तखत लेने का भी आरोप

दीदियों ने सामूहिक रूप से बताया कि जीविका कार्यालय की ओर से बैठक बुलाकर पीएमईजीपी योजना से लोन मिलने और उससे मशरूम उत्पादन कर 30 से 32 हजार रुपये मासिक आमदनी की योजना की बात कही गई। कहा गया कि कंपनी 20 प्रतिशत मुनाफा देकर मशरूम खरीदेगी।

लोन प्रोसेस कराते हुए उनसे सादा पेपर पर दस्तखत और अंगूठा लिया गया। बैंक ने भी महिलाओं की आर्थिक स्थिति जांचे बिना प्रति दीदी 3.5 लाख का लोन दे दिया। दस-दस दीदियों का समूह तो बना, मगर ऋण पर्सनल कर दिया गया।

ऋण स्वीकृति के बाद जीविका डीपीएम ने स्मार्ट मशरूम हट के लिए जक्ष ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी का नाम बता मशरूम हट निर्माण की जिम्मेदारी दे दी।

लोन की राशि एजेंसी के खाते में भेज दी गई। तय समय में मशरूम हट नहीं बनीं। वहीं कार्य प्रारंभ होने के बाद जिस सीसी खाते की राशि का उपयोग किया जाना था वह भी एजेंसी को चेक से दे दी गई।

अब तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद कहा जा रहा है कि मशरूम हट का निर्माण रिवाईवल स्कीम से किया जाएगा। जब राशि का उपयोग किए बिना लोन बढ़कर छह लाख हो गया। अब कोई भी दीदी इस स्थिति में नहीं है कि लोन चुका सके। ऐसे में हम दीदियों के परिवार में यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो जिम्मेदारी डीपीएम, आशुतोष मंगलम व बैंक कर्मी की होगी।

प्राथमिकी के बाद भी गिरफ्तारी नहीं 

दीदियों का सवाल यह भी है कि ठगी और प्राथमिकी के बाद भी आशुतोष मंगलम पर कार्रवाई नहीं हुई। गिरफ्तारी की जगह उसे बैठक में बुलाया जा रहा है। उसकी ऊंची पहुंच के कारण जीविका दीदियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।