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    विक्रमशिला सेतु संकट के बीच मुजफ्फरपुर के भी दो पुल जर्जर, भारी वाहनों पर रोक की तैयारी

    Updated: Thu, 21 May 2026 06:05 PM (GMT+05:30)

    Dadar Bridge Muzaffarpur: मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर आरओबी और दादर पुल जर्जर हो गए हैं, जिसके बाद प्रशासन भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की तैयारी कर ...और पढ़ें

    पुल पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए डायवर्जन की तैयार की जा रही है। फोटो: जागरण

    पुल पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए डायवर्जन की तैयार की जा रही है। फोटो: जागरण

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    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Dilapidated Bridges: बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के पाया नंबर 133 के पास का एक हिस्सा (स्लैब) अचानक टूटकर नदी में गिर गया। अब बीआरओ की टीम उसे दुरुस्त कर रही है।

    इस संकट के बीच अब मुजफ्फरपुर जिले से भी दो प्रमुख पुलों के जर्जर होने की चिंताजनक खबर सामने आ रही है। शहर के व्यस्त माड़ीपुर आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) और दादर पुल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है, जिसके बाद प्रशासन इन पर भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद करने की तैयारी में है।

    जिला प्रशासन को भेजा गया रूट डायवर्जन

    दोनों पुलों के एक्सपेंशन ज्वाइंट, बैरिंग, पिलर और ग्राउंड लेवल काफी कमजोर हो चुके हैं। इसे देखते हुए पथ निर्माण विभाग ने जिलाधिकारी (डीएम) को एक प्रस्ताव भेजा है।

    इस प्रस्ताव में अनुरोध किया गया है कि जब तक मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक भारी वाहनों के आवागमन को किसी वैकल्पिक मार्ग (रूट डायवर्ट) पर शिफ्ट कर दिया जाए, ताकि पुलों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    आईआईटी पटना ने की थी जांच

    पिछले दिनों पुल निर्माण निगम, पथ निर्माण विभाग और आईआईटी (IIT) पटना की टीम ने संयुक्त रूप से माड़ीपुर आरओबी और दादर पुल का तकनीकी निरीक्षण किया था।

    जांच के बाद टीम ने दोनों ढांचों की अविलंब मरम्मत कराने की जरूरत बताई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुल निर्माण निगम ने माड़ीपुर आरओबी के लिए करीब 4.50 करोड़ रुपये और दादर पुल के लिए 4 करोड़ रुपये यानी कुल 9.50 करोड़ रुपये का प्राक्कलन (इस्टीमेट) तैयार कर मुख्यालय को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजा है।

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    वरीय परियोजना अभियंता आलोक कुमार ने बताया कि मुख्यालय से हरी झंडी मिलते ही धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

    कार्बन फाइबर और ईपोक्सी तकनीक

    इन दोनों जर्जर पुलों को नया जीवन देने के लिए आधुनिक 'कार्बन फाइबर' और 'ईपोक्सी इंजेक्शन' तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

    इस तकनीक के जरिए पिलर और स्लैब के खोखलेपन, दरारों और कमजोर हिस्सों में ईपोक्सी कंक्रीट इंजेक्ट किया जाता है, जिससे पुरानी कंक्रीट आपस में मजबूती से जुड़ जाती है।

    यह तकनीक जंग निरोधक के रूप में भी काम करती है, जिससे पुल के अंदर के सरियों (लोहे की छड़ों) को जंग से बचाया जा सकेगा। इस वैज्ञानिक मरम्मत से दोनों पुलों की उम्र (लाइफ) करीब 20 साल और बढ़ जाएगी।

    छह दशक पुराना माड़ीपुर आरओबी

    माड़ीपुर आरओबी का निर्माण करीब 60 साल पहले कराया गया था और हैरान करने वाली बात यह है कि यह भारी-भरकम ओवरब्रिज ईंट के पिलरों पर खड़ा है। लंबे समय और भारी दबाव के कारण अब ये पिलर कमजोर होने लगे हैं।

    इससे पहले साल 2013-14 में एक मालगाड़ी से टकराकर इस आरओबी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे बाद में ठीक किया गया था। समय-समय पर इसकी मरम्मत होती रही है, लेकिन अब यह पूरी तरह जर्जर हो चुका है।

    राहत की बात यह है कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए माड़ीपुर में इस आरओबी के समानांतर एक नया ओवरब्रिज और दादर में समानांतर फोरलेन पुल बनाने की कवायद भी तेजी से चल रही है।