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    अगर समय मिले तो आपको भी बम बनाना सिखा दूं, जज से बोले थे बलिदानी खुदीराम बोस

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 05:54 AM (IST)

    Khudiram Bose Execution Date: महान स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के ऐतिहासिक मुकदमे का मुजफ्फरपुर स्थित अदालत भवन और उनका कठघरा बदहाली का शिकार है, जह ...और पढ़ें

    बलिदानी खुदीराम बोस की फाइल फोटो। मुजफ्फरपुर जिला खनन कार्यालय में रखा कठघरे का अवशेष (ऊपर) व मुजफ्फरपुर जिला खनन कार्यालय जहां हुई थी खुदीराम बोस के मुकदमे की सुनवाई। जागरण

    बलिदानी खुदीराम बोस की फाइल फोटो। मुजफ्फरपुर जिला खनन कार्यालय में रखा कठघरे का अवशेष (ऊपर) व मुजफ्फरपुर जिला खनन कार्यालय जहां हुई थी खुदीराम बोस के मुकदमे की सुनवाई। जागरण

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    संक्षेप में पढ़ें

    प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर। Khudiram Bose Muzaffarpur Trial: महान स्वतंत्रता सेनानी बलिदानी खुदीराम बोस से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। मुजफ्फरपुर के जिस अदालत भवन में खुदीराम बोस पर ऐतिहासिक मुकदमा चला था, वहां आज जिला खनन कार्यालय संचालित हो रहा है।

    लोक शिकायत निवारण कार्यालय

    इसी भवन में वर्तमान में जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय भी चल रहा है। सबसे दुखद बात यह है कि जिस लकड़ी के कठघरे में खड़े होकर खुदीराम बोस ने केस की सुनवाई का सामना किया था, वह आज खनन कार्यालय के एक कोने में टुकड़ों में बदहाल पड़ा है।

    30 अप्रैल की घटना

    उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल, 1908 को खुदीराम बोस ने अत्याचारी अंग्रेज मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड की बग्घी पर बम फेंका था। हालांकि, उस बग्घी में किंग्सफोर्ड की जगह ब्रिटिश बैरिस्टर प्रिंगले की पत्नी और बेटी सवार थीं, जिनकी इस घटना में मौत हो गई थी।

    कालिदास बसु ने लड़ा केस

    एक मई को गिरफ्तारी के बाद कार्नडाफ की अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस की ओर से अधिवक्ता कालिदास बसु, उपेंद्रनाथ सेन और क्षेत्रनाथ बंदोपाध्याय ने बिना कोई फीस लिए उनका मुकदमा लड़ा था।

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    सजा पर मुस्कुराए थे खुदीराम

    अभिलेखविद सचिन चक्रवर्ती के अनुसार, 13 जून, 1908 को जब जज ने फांसी की सजा सुनाई तो खुदीराम मुस्कुराने लगे। जज के पूछने पर उन्होंने निर्भीकता से कहा कि अगर थोड़ा समय मिले तो वह जज को भी बम बनाना सिखा सकते हैं। इसके बाद 11 अगस्त को उन्हें फांसी दे दी गई।

    संग्रहालय भेजने की तैयारी

    ऐतिहासिक धरोहर की इस बदहाली पर मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव ने संज्ञान लिया है। डीएम ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है और इस ऐतिहासिक कठघरे को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय भेजने पर विचार किया जाएगा।