बंगाल के मेदिनीपुर से मुजफ्फरपुर तक चलेगी बलिदानी खुदीराम बोस एक्सप्रेस, मंत्रियों ने दिया आश्वासन
Khudiram Bose Express: बंगाल के मेदिनीपुर से मुजफ्फरपुर तक शहीद खुदीराम बोस एक्सप्रेस चलाने की पहल की जाएगी, जिस पर मंत्रियों ने आश्वासन दिया है। खुदी ...और पढ़ें

खुदीराम बोस के ग्रामीणों ने दोनों मंत्रियों को खुदीराम बोस से जुड़ी मांगों का ज्ञापन सौंपा। फोटो: जागरण
HighLights
मेदिनीपुर-मुजफ्फरपुर शहीद खुदीराम बोस एक्सप्रेस चलाने की पहल शुरू।
खुदीराम बोस के ऐतिहासिक कठघरे के संरक्षण की भी मांग।
उनकी स्मृतियों से जुड़ी पवित्र मिट्टी मुजफ्फरपुर लाई गई।
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Medinipur Muzaffarpur Train: बंगाल के मेदिनीपुर से मुजफ्फरपुर तक शहीद खुदीराम बोस एक्सप्रेस चलाने की पहल की जाएगी।
अमर बलिदानी खुदीराम बोस के ग्रामीणों ने इस मांग के साथ जल शक्ति राज्य मंत्री डा. राजभूषण चौधरी और पर्यटन मंत्री केदार गुप्ता से मुलाकात की। दोनों मंत्रियों को खुदीराम बोस से जुड़ी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
ऐतिहासिक कठघरे की मांग
ज्ञापन में मेदिनीपुर से मुजफ्फरपुर तक शहीद खुदीराम बोस एक्सप्रेस चलाने के साथ उस ऐतिहासिक लकड़ी के कठघरे को संरक्षित करने की मांग की गई, जहां मुकदमे की सुनवाई के दौरान खुदीराम बोस खड़े होते थे।
खुदीराम बोस पर शोध करने वाले अरिंदम भौमिक के साथ ग्रामीणों ने अतिथि गृह में मंत्रियों से मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने इस दिशा में पहल करने का आश्वासन दिया।

गांव से मिट्टी लाई
अमर बलिदानी खुदीराम बोस की स्मृतियों से जुड़ी पवित्र मिट्टी और सिद्धेश्वरी काली माता का चरणामृत पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से मुजफ्फरपुर लाया गया।
यह मिट्टी उस विद्यालय के खेल मैदान की है, जहां खुदीराम बोस ने बचपन में पढ़ाई की थी। अरिंदम भौमिक को यह मिट्टी मिदनापुर कालेजिएट स्कूल की प्रधानाध्यापिका हिमानी पार्या ने सौंपी।
विद्यालय का बदला नाम
बताया गया कि उस समय विद्यालय का नाम हेमिल्टन स्कूल था, जो अब कालेजिएट स्कूल के नाम से जाना जाता है।
इसके साथ ही मिदनापुर स्थित सिद्धेश्वरी काली मां का पवित्र चरणामृत भी मुजफ्फरपुर लाया गया। विशेष पूजा के बाद मंदिर प्रबंधन की ओर से हिमाद्री चट्टोपाध्याय ने चरणामृत सौंपा।
फांसी स्थल पर अर्पण
मिट्टी और चरणामृत को अमर बलिदानी खुदीराम बोस के फांसी स्थल और चिताभूमि पर अर्पित किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि इससे खुदीराम बोस की स्मृतियों से जुड़े दोनों स्थानों के बीच भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव और मजबूत होगा।