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    बीआरएबीयू स्नातक नामांकन अटका: समर्थ पोर्टल और यूएमआईएस के बीच फंसा 1.27 लाख छात्रों का भविष्य

    Updated: Fri, 29 May 2026 12:03 PM (IST)

    Samarth Portal Bihar: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में स्नातक नामांकन प्रक्रिया 'समर्थ पोर्टल' लागू करने के सरकारी निर्देश के ...और पढ़ें

    1.27 लाख छात्र-छात्राओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। फाइल फोटो

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    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Brabu UG Admission: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में स्नातक (UG) नामांकन की प्रक्रिया एक बार फिर प्रशासनिक और तकनीकी पेंच में फंस गई है।

    राज्य सरकार और लोकभवन की ओर से बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों को अनिवार्य रूप से "समर्थ पोर्टल" पर लाइव करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

    इस नए आदेश के बाद विश्वविद्यालय में पहले से चल रही नामांकन प्रक्रिया पर अचानक ब्रेक लग गया है, जिससे करीब 1.27 लाख छात्र-छात्राओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    यूएमआईएस पर आवेदन के बाद फंसी प्रक्रिया

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीते 4 मई से यूएमआईएस (UMIS) पोर्टल के माध्यम से स्नातक नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन लेने की शुरुआत की थी। इसके लिए अंतिम तिथि 25 मई तय की गई थी, जिस दौरान कुल 1.27 लाख अभ्यर्थियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया।

    विश्वविद्यालय जब आवेदन की तिथि बढ़ाने और पहली मेरिट लिस्ट जारी करने की तैयारी में जुटा था, ठीक उसी वक्त लोकभवन से एक नया फरमान जारी हो गया।

    नए निर्देश के तहत स्पष्ट किया गया है कि कोई भी विश्वविद्यालय यूएमआईएस या किसी अन्य समानांतर डिजिटल एजेंसी के साथ न तो नया करार कर सकता है और न ही पुराने कॉन्ट्रैक्ट का विस्तार कर सकता है।

    इस आदेश के बाद बीआरएबीयू समेत राज्य के कई विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी तरह ठहर गई है।

    सालभर से समर्थ पोर्टल लागू करने की कवायद

    शिक्षा विभाग और लोकभवन पिछले करीब एक वर्ष से राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को केंद्रीयकृत 'समर्थ पोर्टल' से जोड़ने की मुहिम में लगे हैं। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत एडमिशन, परीक्षा, पे-रोल, लीव और स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन समेत कुल 44 अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं।

    बीते वर्ष समीक्षा बैठक में दिसंबर तक हर हाल में एडमिशन, पे-रोल और लीव मॉड्यूल को एक्टिव करने को कहा गया था, लेकिन बीआरएबीयू समेत अधिकांश यूनिवर्सिटी तय समय में इसकी तैयारी पूरी नहीं कर सकीं।

    अप्रैल महीने में बीआरएबीयू ने किसी तरह सिर्फ लीव मॉड्यूल को चालू किया, लेकिन एडमिशन मॉड्यूल पर तकनीकी सपोर्ट सिस्टम दुरुस्त न होने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। यही वजह रही कि पीजी के बाद स्नातक नामांकन के लिए भी पुराने यूएमआईएस का सहारा लेना पड़ा।

    समर्थ और यूएमआईएस के बीच फंसा भविष्य

    विश्वविद्यालय प्रशासन अब दोहरे संकट में है। एक तरफ सरकार की ओर से समर्थ पोर्टल को अनिवार्य कर दिया गया है, तो दूसरी तरफ वर्तमान में 1.27 लाख छात्रों का पूरा संवेदनशील डाटा और आवेदन प्रक्रिया पहले से यूएमआईएस पर जमा है।

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    दोनों प्लेटफॉर्म्स के बीच तकनीकी तालमेल (कोऑर्डिनेशन) न होने से नामांकन प्रक्रिया में करीब 15 दिनों का विलंब हो चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन अभ्यर्थियों का डाटा किस पोर्टल पर ट्रांसफर होगा और मेरिट सूची कब आएगी।

    फिलहाल विश्वविद्यालय के अधिकारी शिक्षा विभाग से गाइडलाइन मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर अधर में लटके छात्र असमंजस और ऊहापोह की स्थिति में हैं।