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बिहार में फिल्मी गाने छोड़ मैथिली सॉन्ग पर झूम रहे बच्चे, झिझिया डांस से जुड़ी है Mystery

By Keshav KumarEdited By: Dharmendra Singh
Published: Tue, 13 Oct 2026 09:17 AM (IST)

Jhijhiya Dance Mystery : बिहार के दुर्गा पूजा पंडालों में इस बार बच्चे फिल्मी गानों की बजाय पारंपरिक झिझिया नृत्य ...और पढ़ें

HighLights

  1. दुर्गा पूजा में बच्चे झिझिया नृत्य से संस्कृति दर्शा रहे।

  2. सिर पर छिद्रों वाला घड़ा, जलता दीपक आकर्षण का केंद्र।

  3. यह नृत्य बुरी नजर से सुरक्षा का पारंपरिक कवच है।

केशव कुमार, मुजफ्फरपुर । दुर्गा पूजा के दौरान बिहार के पूजा पंडालों में इस बार एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। फिल्मी गानों की जगह पारंपरिक झिझिया गीतों पर बच्चे जमकर थिरक रहे हैं।

सिर पर छिद्रों वाला घड़ा और उसमें जलता दीपक लेकर किया जाने वाला यह नृत्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। मिथिला की लोक संस्कृति से जुड़ी झिझिया की परंपरा जितनी खूबसूरत है, उससे जुड़ी मान्यताएं भी उतनी ही रोचक हैं।

पारंपरिक लोक संस्कृति की अनूठी छटा

शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही बिहार के दुर्गा पूजा पंडालों में पारंपरिक लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखरने लगी है। इस बार पंडालों में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बना है पारंपरिक झिझिया नृत्य। खासकर छोटे-छोटे बच्चों द्वारा इस लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति को देखने के लिए पूजा पंडालों में भारी भीड़ उमड़ रही है, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रही है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

आधुनिक चकाचौंध के बीच जहां पारंपरिक कलाएं लुप्त होने की कगार पर थीं, वहीं इस साल मुजफ्फरपुर और आसपास के पूजा पंडालों में सांस्कृतिक समितियों ने नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने की बेहतरीन पहल की है।

रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों की टोलियां जब सिर पर छिद्रों वाला घड़ा और उसमें जलता दीपक लेकर पंडालों में उतरती हैं, तो पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है।

'तोहरे भरोसे ब्रह्म बाबा...' गीतों से गूंजे पंडाल

"तोहरे भरोसे ब्रह्म बाबा झिझिया बनैली हो..." जैसे पारंपरिक गीतों पर बच्चों के सधे हुए कदम और उनके चेहरे के भाव दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं।

पंडालों में आए श्रद्धालुओं का कहना है कि लाउडस्पीकर पर बजने वाले फिल्मी गानों की तुलना में बच्चों द्वारा लाइव दी जा रही यह सांस्कृतिक प्रस्तुति सीधे दिल को छूती है। यह आयोजन न केवल त्योहार की रौनक बढ़ा रहा है, बल्कि हमारी धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखने का एक सराहनीय प्रयास साबित हो रहा है।

क्या है झिझिया का ताना-बाना?

बुरी नजर से सुरक्षा का कवच: लोक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के दौरान तांत्रिक और बुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। झिझिया नृत्य के जरिए मां दुर्गा से समाज और बच्चों को बुरी नजर और डाइन-जोगिन की शक्तियों से बचाने की प्रार्थना की जाती है।

छिद्रों वाले घड़े का रहस्य: नृत्य के दौरान महिलाएं और बच्चे सिर पर मिट्टी का घड़ा (झिझिया) रखते हैं, जिसमें कई छेद होते हैं और भीतर दीपक जलता रहता है।

दिलचस्प चुनौती: परंपरा के अनुसार, नृत्य इतनी तेजी और कुशलता से किया जाता है कि कोई भी घड़े के छेदों को गिन न सके। माना जाता है कि यदि कोई तांत्रिक इन छेदों को गिन ले, तो घड़ा तुरंत फूट जाता है।

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