राजधानी एक्सप्रेस के पावर कार से 22.3 किलो गांजा जब्त, AC मैकेनिक गिरफ्तार; बिहार में RPF की कार्रवाई
राजधानी एक्सप्रेस के पावर कार से 22.3 किलो गांजा बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 11.15 लाख रुपये है।

पकड़ा गया आरोपी। (जागरण)
HighLights
राजधानी एक्सप्रेस के पावर कार से 22.3 किलो गांजा जब्त।
गांजे की अनुमानित कीमत 11 लाख 15 हजार रुपये बताई गई।
संविदा पर कार्यरत एसी मैकेनिक को गिरफ्तार कर जीआरपी को सौंपा।
संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन के पावर कार से गांजे की बड़ी खेप बरामद होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रेलवे सुरक्षा बल की अपराध खुफिया शाखा की टीम ने शनिवार देर रात सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस के पावर कार से 22 किलो 300 ग्राम गांजा बरामद किया।
जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 11 लाख 15 हजार रुपये बताई गई है। मामले में पावर कार में संविदा पर कार्यरत एसी मैकेनिक को गिरफ्तार कर जीआरपी के हवाले कर दिया गया।
आरपीएफ इंस्पेक्टर सुजीत कुमार यादव व एसके सुधा के नेतृत्व में विशेष टीम ने भागलपुर स्टेशन पर ट्रेन के पावर कार में सवार होकर वीडियोग्राफी के साथ तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के दौरान कोच संख्या 234033 में एक युवक सीट के नीचे दो काले बैग छिपाकर बैठा मिला। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्ती से पूछताछ की गई।
आरोपित ने अपना नाम करेंद्र दास, निवासी कामरूप, असम बताया। पूछताछ में उसने गांजा हाइलाकांदी से आनंद विहार ले जाने की बात स्वीकार की। इसके बदले उसे 20 हजार रुपये मिलने थे।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपित को जमालपुर स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर उतारा गया। राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में दोनों बैग की तलाशी ली गई, जिसमें गांजा बरामद हुआ।
राजधानी के पावर कार तक पहुंची नशे की खेप
राजधानी एक्सप्रेस के पावर कार में 22 किलो से अधिक गांजा पहुंच जाना महज एक तस्करी का मामला नहीं, बल्कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध का गंभीर संकेत है।
जिस पावर कार में आम यात्रियों की आवाजाही सीमित मानी जाती है, वहां इतनी बड़ी खेप का पहुंचना बताता है कि निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।
सवाल यह है कि आखिर ट्रेन में सवार होने से लेकर पावर कार तक गांजा पहुंचने के दौरान सुरक्षा जांच कहां थी? आरपीएफ की कार्रवाई के बाद अब केवल आरोपित की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यह भी जांच जरूरी है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और रेलवे परिसर के भीतर उसे सहयोग कौन कर रहा था।
