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    Bihar Board 10th Topper: फुटपाथ पर झिल्ली-मुरही बेचने वाले के बेटे अमित को स्टेट में 7वां स्थान

    By Braj Mohan Mishra Edited By: Ajit kumar
    Updated: Sun, 29 Mar 2026 06:55 PM (IST)

    BSEB Matric Result 2026:अमित राज ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 में 484 अंक (96.8%) प्राप्त कर राज्य में सातवां स्थान हासिल किया है। लदनियां के म ...और पढ़ें

    अमित राज (बाएं) के पिता  संजय साह लदनियां बाजार में बेचते हैं झिल्ली मुरही। फोटो: जागरण

    अमित राज (बाएं) के पिता  संजय साह लदनियां बाजार में बेचते हैं झिल्ली मुरही। फोटो: जागरण

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    संवाद सहयोगी, लदनियां (मधुबनी)। Bihar Board Matric Topper: यह कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उस संघर्ष की दास्तान है जो सपनों को सच करने की ताकत देता है।

    लदनियां प्रखंड के महथा उच्च विद्यालय के छात्र अमित राज ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 में 484 अंक (96.8 प्रतिशत) प्राप्त कर राज्य में सातवां स्थान हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे इलाके को गौरवान्वित कर दिया है।

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    पिता का संघर्ष

    अमित का सफर आसान नहीं था। उनके पिता संजय साह लदनियां बाजार में फुटपाथ पर झिल्ली-मुरही बेचकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। मां गायत्री देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े अमित ने अपने हालात को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

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    पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया

    दो भाइयों में छोटे अमित ने शुरुआत से ही पढ़ाई को अपना लक्ष्य बना लिया था। उन्होंने कोचिंग के बजाय सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया और रोजाना 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उन्होंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा। उनकी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गणित में 100 में 100 अंक हासिल किए।

    पिता के संघर्ष से प्रेरणा

    अमित कहते हैं कि उन्हें हमेशा यह एहसास रहा कि उनके पिता कितनी मेहनत करके घर चलाते हैं और उनकी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। यही सोच उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती रही।

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    अपनी सफलता का श्रेय अमित ने अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनका सपना है कि वे आगे चलकर डॉक्टर बनें और समाज के लोगों की सेवा करें।

    अमित की यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल राह रोक नहीं सकती। आज उनकी सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।