मधेपुरा नगर परिषद की बैठक में हंगामा और तालाबंदी; प्रस्ताव पंजी में गड़बड़ी पर भड़के पार्षद, अफसर भी फंसे
मधेपुरा नगर परिषद की बैठक पार्षदों के हंगामे और तालाबंदी के कारण रद्द हो गई, जिसमें प्रस्ताव पंजी में छेड़छाड़ और मनमाने फैसलों का आरोप लगाया गया। आक् ...और पढ़ें

मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी दो घंटे तक दफ्तर में फंसे रहे, प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर खुला ताला
HighLights
मधेपुरा नगर परिषद की बैठक हंगामे के कारण रद्द हुई।
पार्षदों ने प्रस्ताव पंजी में छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
मुख्य पार्षद और अधिकारी दो घंटे तक कार्यालय में फंसे।
संवाद सहयोगी, मधेपुरा। मधेपुरा नगर परिषद की शनिवार दोपहर आयोजित सामान्य बोर्ड की बैठक भारी हंगामे और विरोध के कारण बिना किसी निर्णय के रद्द हो गई। बैठक शुरू होते ही आक्रोशित वार्ड पार्षदों ने मुख्य पार्षद और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए नगर परिषद कार्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी और धरने पर बैठ गए।
पार्षदों का आरोप था कि पिछली बैठकों की प्रस्ताव पंजी में मनमाने तरीके से छेड़छाड़ की गई है और बिना सदन में चर्चा कराए कई योजनाओं को चढ़ा दिया गया है। इसके अलावा अपने चहेते दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का मानदेय अचानक बढ़ा दिया गया।
मुख्य पार्षद के बाहर निकलते ही भड़का आक्रोश, दो घंटे बंधक रहे अफसर
पार्षदों ने कहा कि 25 अगस्त 2025 को हुई बैठक के कार्यवृत्त में बिना किसी बहस के कई विवादित प्रस्ताव शामिल किए गए, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं। हंगामा बढ़ने पर जब मुख्य पार्षद कविता कुमारी साहा अचानक बैठक बीच में छोड़कर बाहर निकलने लगीं, तो पार्षदों का गुस्सा और भड़क गया।
आक्रोशित पार्षदों ने आनन-फानन में नगर परिषद के मुख्य गेट में ताला जड़ दिया। इस वजह से मुख्य पार्षद कविता कुमारी साहा, कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी और कई अन्य कर्मचारी करीब दो घंटे तक कार्यालय परिसर के भीतर ही फंसे रहे।
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पुलिस और एलआरडीसी के हस्तक्षेप के बाद खुला ताला
घटना की जानकारी मिलते ही पहले सदर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पार्षदों के कड़े रुख को देखते हुए पीछे हट गई। इसके बाद एलआरडीसी अनंत कुमार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और पार्षदों से वार्ता की। उन्होंने पार्षदों से लिखित आवेदन लेकर मामले की निष्पक्ष जांच और समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद पार्षदों ने गेट का ताला खोला।
वहीं मामले पर मुख्य पार्षद कविता कुमारी साहा ने कहा कि पार्षदों द्वारा नियम विरुद्ध फैसले लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। दबाव बनाने के उद्देश्य से ही तालाबंदी की गई, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों के आने के बाद खुलवाया गया।