इस बार अद्भुत संयोग में मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव : गृहस्थ व वैष्णव एक ही दिन मनाएंगे जन्माष्टमी, 46 मिनट तक है खास
Krishna Janmashtami 2026 इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग के दुर्लभ संयोग में मनाई ...और पढ़ें

Krishna Janmashtami 2026: रोहिणी नक्षत्र व हर्षण योग में 4 सितंबर को मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
HighLights
4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग में जन्माष्टमी।
पुरैनी के मकदमपुर, कड़ामा में जन्मोत्सव की तैयारी।
मध्य रात्रि 11:57 से 12:43 तक पूजन का शुभ मुहूर्त।
संवाद सूत्र, पुरैनी (मधेपुरा)। Krishna Janmashtami 2026भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाने वाला आस्था का महापर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष चार सितंबर (शुक्रवार) को रोहिणी नक्षत्र एवं हर्षण योग के विशेष शुभ संयोग में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर को लेकर पुरैनी प्रखंड क्षेत्र के मकदमपुर पंचायत स्थित कहरटोली और सपरदह पंचायत के कड़ामा में भव्य प्रतिमा स्थापना और जन्मोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं।
4 सितंबर (शुक्रवार) को रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग के दुर्लभ संयोग में मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी; गृहस्थ व वैष्णव एक ही दिन मनाएंगे पर्व
मध्य रात्रि 11:57 से 12:43 बजे तक रहेगा बाल गोपाल के प्राकट्य और जन्मोत्सव पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय
पुरैनी प्रखंड के मकदमपुर (कहरटोली) और सपरदह (कड़ामा) में प्रतिमा स्थापना को लेकर तैयारियां जोरों पर
मकदमपुर निवासी पंडित पवन झा के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तीन सितंबर (गुरुवार) की रात 01:33 बजे से शुरू हो रही है। उदयकालीन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत महासंयोग चार सितंबर को मिल रहा है। सनातन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी तिथि को जन्मोत्सव के लिए सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत फलदायी माना गया है। इसी शुभ संयोग के चलते इस वर्ष गृहस्थ एवं वैष्णव संप्रदाय दोनों एक ही दिन चार सितंबर को एक साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।
मध्य रात्रि 11:57 से 12:43 बजे तक रहेगा जन्मकाल का मुहूर्त
पंडित पवन झा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि में हुआ था। इस वर्ष चार सितंबर की मध्य रात्रि 11:57 बजे से 12:43 बजे तक मुख्य जन्मकाल का समय रहेगा।
धार्मिक मान्यता है कि रोहिणी युक्त अष्टमी में विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की कथा का श्रवण करने से साधक को यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर वर्ष की भांति इस बार भी कहरटोली और कड़ामा में भगवान श्रीकृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित कर विशेष मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इस विधि से करें बाल गोपाल का पूजन और अभिषेक
पंडित पवन झा ने जन्माष्टमी पूजन की विधि बताते हुए कहा कि व्रतियों को सुबह स्नान-ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। मुख्य जन्मोत्सव पूजन मध्य रात्रि में किया जाता है:
अभिषेक व स्थापना: शुभ मुहूर्त में चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) को स्थापित करें और पंचामृत तथा गंगाजल से विधि-विधान पूर्वक अभिषेक कराएं।
श्रृंगार व भोग: अभिषेक के बाद प्रभु को नवीन वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बांसुरी और वैजयंती माला से सजाएं।
नैवेद्य: भगवान श्रीकृष्ण को माखन, मिश्री, पंचामृत, धनिए की पंजीरी, नारियल के लड्डू, फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर आरती करें।
