'मैं रहूं या न रहूं, भारत रहना चाहिए'; किशनगंज में बोलीं साध्वी ऋतंभरा- बच्चों को दें राष्ट्रभक्ति का संस्कार
साध्वी ऋतंभरा ने किशनगंज के ठाकुरगंज में कहा कि बच्चों में आधुनिक शिक्षा के साथ सनातन धर्म और राष्ट्रभक्ति के संस्कार बोना आवश्यक है। उन्होंने राम मंद ...और पढ़ें

ठाकुरगंज के गांधी मैदान में परम शक्ति पीठ के तत्वावधान में आयोजित हुआ दिव्य दर्शन एवं अमृतमय आध्यात्मिक प्रवचन
HighLights
बच्चों में सनातन धर्म और राष्ट्रभक्ति के संस्कार बोना आवश्यक है।
साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष को याद किया।
रामलला सदियों की तपस्या के बाद भव्य मंदिर में विराजमान हुए।
संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। अपनी संतानों और आने वाली पीढ़ी के मन में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सनातन धर्म के अटूट संस्कारों के बीज बोना बेहद आवश्यक है। यह सिलसिला पीढ़ी-दर-पीढ़ी यूं ही अनवरत चलना चाहिए। "मैं रहूं या ना रहूं, लेकिन यह भारतवर्ष सदैव रहना चाहिए।" यह ओजस्वी विचार दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान ठाकुरगंज के ऐतिहासिक गांधी मैदान में व्यक्त किए।
वे यहां आयोजित दिव्य दर्शन एवं अमृतमय आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम के अवसर पर अपार जनसमूह को संबोधित कर रही थीं। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन 'परम शक्ति पीठ सेवा प्रकल्प' और 'वात्सल्य सेवा केंद्र' के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
'अत्याचारों के बावजूद अमिट रहा सनातन
साध्वी ऋतंभरा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत भूमि का इतिहास महान त्याग, बलिदान और स्वाभिमान का रहा है। हजारों वर्षों तक सनातन विरोधी ताकतों ने इस संस्कृति को कुचला, मसला, तोड़ा और मरोड़ा, लेकिन इसके अमर अस्तित्व को कभी मिटा नहीं सके।
वीरांगनाओं ने धर्म के लिए किए जौहर'
हमारी अनगिनत मातृ शक्तियों ने अपने सतीत्व और धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते जौहर किया और अग्नि में स्नान किया, परंतु अधर्म के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने नेपाल व पश्चिम बंगाल की सीमा पर बसे ठाकुरगंज के लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और व्यापार के अवसर दें, लेकिन इसके साथ ही राष्ट्रभक्ति और धर्मरक्षा का संस्कार देना कभी न भूलें।
खबरें और भी
राम मंदिर आंदोलन का किया स्मरण
श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं साध्वी ऋतंभरा ने अयोध्या आंदोलन के लंबे संघर्ष के दिनों को भावुक होकर याद किया। उन्होंने कहा कि सदियों की अनवरत प्रतीक्षा और करोड़ों रामभक्तों की कठिन तपस्या के बाद आज हमारे प्रभु रामलला अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं।
बोलीं- संकल्प और तपस्या से विराजे रामलला
उन्होंने बताया कि इस पावन संकल्प को पूरा करने के लिए देश के कई भक्तों ने वर्षों तक नंगे पैर यात्रा की, किसी ने अन्न का त्याग किया तो कई माताओं और बहनों ने अपने केश खोलकर प्रतिज्ञा ली थी। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमारी पीढ़ी को इस ऐतिहासिक पल को देखने का अवसर मिला।
मोटरसाइकिल रैली और शंखनाद के साथ हुआ भव्य नागरिक अभिनंदन
प्रवचन स्थल पर आगमन से पूर्व बिहार-बंगाल बॉर्डर पर हजारों युवाओं ने भव्य मोटरसाइकिल रैली निकालकर साध्वी ऋतंभरा का जोरदार स्वागत किया। नगर क्षेत्र में प्रवेश करते ही महिला स्वयंसेवकों ने शंखनाद और पुष्प वर्षा कर उनकी अगवानी की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन प्रमुख ताराचंद धानुका, स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल, मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल, पूर्व मुख्य पार्षद देवकी अग्रवाल, प्रमोद कुमार चौधरी, जिला परिषद सदस्य निरंजन राय और कन्हैया लाल महतो सहित कई गणमान्य मौजूद रहे। वहीं, सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम अनिकेत कुमार, एसडीपीओ मनोज कुमार सिंह, बीडीओ आशीष कुमार और थानाध्यक्ष अंजय अमन पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे।