खुद को डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताने वाला फर्जी IAS अरेस्ट; खगड़िया में शराब व 'भारत सरकार' लिखी गाड़ियां जब्त
खगड़िया पुलिस ने गोगरी में खुद को आईएएस अधिकारी और एनएसए अजित डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताने वाले मनीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। उसके घर से शराब ...और पढ़ें

गोगरी में खगड़िया एसपी के निर्देश पर DIU और पुलिस टीम ने मनीष गुप्ता के आलीशान मकान पर मारी रेड
HighLights
खुद को आईएएस व एनएसए का एजेंट बताता था।
पुलिस ने घर से शराब और संदिग्ध आईडी कार्ड बरामद किया।
'भारत सरकार' लिखी दो लग्जरी गाड़ियां भी जब्त हुईं।
संवाद सूत्र, गोगरी (खगड़िया)। खगड़िया पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह के निर्देश पर गठित विशेष टीम और डीआईयू (DIU) ने शनिवार को गोगरी नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-30 (कांग्रेस कार्यालय के पास) में बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने खुद को आईएएस (IAS) अधिकारी बताकर इलाके में रौब जमाने वाले मनीष कुमार गुप्ता के आलीशान घर पर छापेमारी कर उसे हिरासत में ले लिया।
दोपहर दो बजे शुरू हुई यह छापेमारी रात नौ बजे तक यानी करीब सात घंटे तक चली। इस दौरान पुलिस को आरोपी के घर से शराब और एक संदिग्ध प्रशासनिक अधिकारी का आईडी कार्ड बरामद हुआ, जिसका सत्यापन कराया जा रहा है।
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'NSA अजित डोभाल का अंडरकवर एजेंट हूं'
सूत्रों के अनुसार, जब एसडीपीओ के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने मनीष गुप्ता से उसकी पहचान पूछी, तो उसने दावा किया कि वह भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल का 'अंडरकवर एजेंट' है। हालांकि, जब पुलिस ने इससे संबंधित दस्तावेज मांगे, तो वह कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका।
पुलिस ने मौके से 'भारत सरकार' का बोर्ड लगी उसकी दो महंगी ऑटोमेटिक लग्जरी गाड़ियों को भी जब्त कर लिया है। गोगरी एसडीपीओ चंदन कुमार ठाकुर ने बताया कि आरोपी के अधिकारी होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है और घर से शराब बरामद होने के मामले में उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
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कोरोना काल में बनाया आलीशान मकान
स्थानीय लोगों के अनुसार, मनीष गुप्ता गोगरी केडीएस कॉलेज के दिवंगत प्राध्यापक परमेश्वर गुप्ता का सबसे छोटा बेटा है। वह पहले अपने भाइयों के साथ बाहर रहता था, लेकिन कोरोना महामारी के समय से अपने पैतृक घर में रहने लगा। इसी दौरान उसने करोड़ों का आलीशान मकान बनाया और लाखों की ऑटोमेटिक लग्जरी गाड़ियां खरीदीं।
भाइयों का विदेश में नेटवर्क
स्थानीय निवासियों ने बताया कि मनीष के छह भाई हैं, जिनमें से दो भाई कनाडा में रहते हैं, एक बोकारो में टाटा स्टील में कार्यरत है और अन्य भाई प्राध्यापक व व्यवसायी हैं। पुलिस अब उसकी संपत्ति और फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।