सरहदें बेअसर, रिश्तों में वही मिठास : नेपाल में भारतीय परंपरा से सजीं भाइयों की कलाइयां, बहनों ने कहा- रक्षा करना
नेपाल के विराटनगर में रक्षाबंधन का पर्व भारतीय परंपराओं के साथ धूमधाम से मनाया गया, जहाँ सरहदें रिश्तों की मिठास ...और पढ़ें

भारत-नेपाल के साझा सांस्कृतिक जुड़ाव की दिखी मिसाल; विराटनगर और आसपास के तराई इलाकों में धूमधाम से मना रक्षाबंधन
HighLights
विराटनगर में भारतीय परंपरा से मना रक्षाबंधन पर्व।
सरहद पार से परिजनों का मिलन, बाजारों में रौनक।
भारत-नेपाल के 'रोटी-बेटी' संबंध हुए प्रगाढ़।
संवाद सूत्र, सालमारी (कटिहार)। सरहदें भले ही दो देशों के बीच भौगोलिक लकीरें खींचती हों, लेकिन आस्था, परंपरा और आत्मीय रिश्तों के आगे ये सीमाएं बेअसर साबित होती हैं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर इसकी जीवंत और मनमोहक झलक पड़ोसी देश नेपाल के विराटनगर सहित आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में देखने को मिली। भारत की तरह ही नेपाल में भी भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का यह पर्व पूरे पारंपरिक उल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया।
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सरहद पार पहुंचे परिजन
सुबह से ही विराटनगर के घर-घर में सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा बिखरी रही। बहनों ने थाल सजाकर पारंपरिक रीति से भाइयों की आरती उतारी, माथे पर कुमकुम-चंदन का तिलक लगाया और उनकी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधकर दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। वहीं, भाइयों ने भी जीवन के हर मोड़ और सुख-दुख में बहनों का संबल बने रहने का वचन दोहराते हुए उन्हें मनपसंद उपहार व नेग भेंट किए।
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विराटनगर के बाजारों में रही त्योहारी रौनक
पर्व को लेकर विराटनगर के मुख्य बाजारों में सुबह से ही उत्सवी हलचल चरम पर रही। रंग-बिरंगी डिजाइनर राखियों, पूजा सामग्री, ताजे फलों और पारंपरिक मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार सीमा पार विराटनगर पहुंचे, तो कई नेपाली बहनें भी भारतीय क्षेत्रों में रह रहे अपने भाइयों के घर पहुंचीं, जिससे दोनों देशों के बीच पारिवारिक मिलन का भावुक दृश्य देखने को मिला।
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सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक 'रोटी-बेटी' के संबंध हुए और प्रगाढ़
नेपाल में रक्षाबंधन का यह उल्लास न केवल भाई-बहन के पावन रिश्ते को मजबूती दे रहा था, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव और 'रोटी-बेटी' के पारिवारिक रिश्ते को भी और अधिक प्रगाढ़ करता नजर आया। दिनभर घरों से लेकर बाजारों तक गूंजते पारंपरिक गीतों और पारिवारिक मुलाकातों ने दोनों देशों के साझा लोकाचार की खूबसूरत तस्वीर पेश की।
