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    जमुई की बेटियों का कमाल, एक ही घर में दो सगी बहनें बनीं डॉक्टर; जिले का नाम किया रोशन

    Updated: Fri, 22 May 2026 04:04 PM (IST)

    जमुई के सिमुलतला की दो सगी बहनें, डॉ. स्वास्तिक आर्यन और डॉ. साक्षी रानी, डॉक्टर बनकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. डॉ. स्वास्तिक आर्यन ने कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरी की।

    2. बड़ी बहन डॉ. साक्षी रानी पीएमसीएच पटना से डॉक्टर हैं।

    3. जमुई के सिमुलतला की दो बहनों ने डॉक्टरी में नाम कमाया।

    संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। शिक्षा, कठिन परिश्रम और माता-पिता का अटूट विश्वास जब एक साथ मिलते हैं, तो कामयाबी के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं।

    ऐसा ही कुछ अभूतपूर्व कर दिखाया है जमुई जिले के सिमुलतला की दो सगी बहनों ने, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर चिकित्सा क्षेत्र में पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

    हाल ही में कोलकाता के प्रतिष्ठित कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के दीक्षांत समारोह में डॉ. स्वास्तिक आर्यन को उनकी एमबीबीएस डिग्री और सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया।

    डॉ. स्वास्तिक ने अपनी पांच साल की कठिन पढ़ाई और इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें हर तरफ से बधाइयां मिल रही हैं।

    इस दोहरी सफलता की नींव रखने वाले पिता शैलेंद्र बरनवाल और माता पूनम देवी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों की परवाह न करते हुए बेटियों के सपनों को पंख दिए।

    बड़ी बहन भी है डॉक्टर

    डॉ. स्वास्तिक की इस कामयाबी में उनकी बड़ी बहन, डॉ. साक्षी रानी का विशेष मार्गदर्शन रहा है। डॉ. साक्षी ने पिछले वर्ष ही बिहार के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल पीएमसीएच, पटना से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और वर्तमान में चिकित्सा सेवा में कार्यरत हैं। आज एक ही घर की दो बेटियों को डाक्टर के रूप में देखकर पूरे सिमुलतला क्षेत्र में जश्न का माहौल है।

    अपनी सफलता पर भावुक होते हुए डॉ. स्वास्तिक आर्यन ने श्रेय माता-पिता और बड़ी बहन को दिया। उन्होंने भविष्य के मेडिकल छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा चिकित्सा का क्षेत्र केवल एक पेशा या व्यवसाय नहीं, बल्कि एक बड़ा सेवा भाव है।

    यहां अस्पतालों में घंटों लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है, जिसके लिए मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत होना और धैर्य रखना बेहद जरूरी है। यदि आपमें देश और मरीजों की सेवा का सच्चा जज्बा है, तभी आप इस कठिन राह पर सफल हो सकते हैं।

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