जमुई में बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ते ही बहा डायवर्जन, कई गांवों का संपर्क टूटा; बड़ीबाग के रास्ते जाना पड़ेगा
खैरा प्रखंड में भारी बारिश के बाद नरियना पुल के पास बना वैकल्पिक डायवर्जन नदी के तेज बहाव में बह गया, जिससे सगदाहा, भंडारा और बेला सहित कई गांवों का स ...और पढ़ें

नरियाना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद सगदाहा, भंडारा और बेला के ग्रामीणों का सहारा बना डायवर्जन नदी में समाया
HighLights
बारिश से नरियना पुल के पास का डायवर्जन बहा।
सगदाहा, भंडारा, बेला सहित कई गांवों का संपर्क टूटा।
ग्रामीणों को अब बड़ीबाग के रास्ते जाना पड़ेगा।
संवाद सूत्र, खैरा (जमुई)। जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र में बारिश के बाद नरियाना पुल के पास बना वैकल्पिक डायवर्जन नदी के तेज बहाव में बह गया। इससे सगदाहा, भंडारा, बेला सहित आसपास के कई गांवों के लोगों की आवागमन से जुड़ी परेशानियां एक बार फिर काफी बढ़ गई हैं। डायवर्जन का बड़ा हिस्सा कट जाने से इस मार्ग पर वाहनों और राहगीरों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
उल्लेखनीय है कि नरियाना पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद से चारपहिया वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई थी, जिसके बाद ग्रामीण इसी डायवर्जन के सहारे आवागमन कर रहे थे।
24 घंटे की बारिश से उफनाई नदी, बहाव नहीं सह सका डायवर्जन
स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते 24 घंटे में प्रखंड क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण नदी के जलस्तर में अचानक उछाल आ गया। नदी का बहाव इतना तेज था कि डायवर्जन मिट्टी के कटाव को बर्दाश्त नहीं कर सका और उसका बड़ा हिस्सा बह गया।
यह डायवर्जन पूर्व में बालू डंपिंग यार्ड के निर्माण के समय बनाया गया था, जो नरियाना पुल पर रोक के बाद ग्रामीणों के लिए लाइफलाइन बना हुआ था। इसके बह जाने से लोगों की कम दूरी में समय और खर्च बचाने की सुविधा पूरी तरह खत्म हो गई है।
अब बड़ीबाग के रास्ते तय करनी होगी दूरी, नए पुल की मांग
डायवर्जन बहने के कारण अब भंडारा, सगदाहा और बेला के ग्रामीणों को खैरा प्रखंड और जमुई जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए बड़ीबाग के रास्ते लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ेगा। इससे लोगों पर समय और पैसे दोनों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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हालांकि, ग्रामीणों ने राहत की बात यह बताई है कि नरियाना पुल के समीप एक नए डायवर्जन का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि नरियाना और मांगोबंदर में नए पुल के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने की बात कही जा रही है। फिलहाल, वैकल्पिक रास्ता न होने से क्षेत्र के हजारों लोगों में मायूसी और आक्रोश है।