नोटों पर बापू का सम्मान, आश्रम में टूटी प्रतिमा पर बंधा बांस व तार; गिद्धौर में 1942 की ऐतिहासिक धरोहर की दुर्दशा
जमुई के गिद्धौर स्थित गांधी आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है, जिसके हाथ-पैर टूटे और गर्दन तार से बंधी है। ...और पढ़ें

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जमुई आए थे बापू; बंझुलिया स्थित गांधी आश्रम में क्षतिग्रस्त पड़ी है महात्मा गांधी की प्रतिमा
HighLights
गिद्धौर के गांधी आश्रम में बापू की प्रतिमा उपेक्षित, क्षतिग्रस्त।
यह 1942 भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर है।
स्थानीय लोग प्रतिमा मरम्मत और आश्रम जीर्णोद्धार की मांग कर रहे।
संवाद सहयोगी, जमुई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर वाला नोट अगर हमारी जेब या हाथ में हो, तो हम उसे बेहद संभालकर रखते हैं। लेकिन उसी बापू की आदमकद प्रतिमा जब अपनी आंखों पर टूटा चश्मा, क्षतिग्रस्त हाथ-पैर और गर्दन में तार लपेटे खड़ी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि हमारी व्यवस्था में बापू के प्रति सम्मान आखिर कितना सच्चा है? जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत बंझुलिया गांव स्थित गांधी आश्रम का यह दृश्य इन दिनों हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है।
आश्रम परिसर में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार है। प्रतिमा का चश्मा गायब है, हाथ-पैर टूटे हुए हैं और गर्दन का हिस्सा टूटने पर उसे तार से बांधकर किसी तरह खड़ा रखा गया है। परिसर में फैली गंदगी भी व्यवस्था की पोल खोल रही है।
1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन
बंझुलिया स्थित इस गांधी आश्रम का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। स्थानीय इतिहास के अनुसार, 'भारत छोड़ो आंदोलन' (1942-43) के दौरान महात्मा गांधी का जमुई क्षेत्र से गहरा लगाव रहा था। उसी ऐतिहासिक दौर में गिद्धौर के बंझुलिया में इस आश्रम की स्थापना की गई थी।
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है इतिहास
इलाके के स्वतंत्रता सेनानियों—कुमार कालिका सिंह, दुर्गा मंडल और कृष्णा सिंह—का बापू से सीधा जुड़ाव था। ऐसे में यह आश्रम केवल एक इमारत या प्रतिमा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत स्मृतियों को संजोए हुए एक ऐतिहासिक धरोहर है।
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सोशल मीडिया पर गूंजी आवाज
इस ऐतिहासिक स्थल की बदहाली को सबसे पहले 'जमुई हंट' और तत्पश्चात 'साइकिल यात्रा एक विचार' मंच ने प्रमुखता से उठाया। मंच के संस्थापक सदस्य विवेक कुमार ने प्रतिमा के वीडियो व तस्वीरें फेसबुक पर साझा करते हुए शासन और समाज से सवाल पूछे हैं।
जीर्णोद्धार और स्मारक बनाने की मांग
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रतिमा की अविलंब मरम्मत कराई जाए, परिसर को स्वच्छ बनाया जाए और इसे एक भव्य स्मारक के रूप में विकसित किया जाए, ताकि स्कूली बच्चों को यहां लाकर जमुई के स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया जा सके।