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    अचला सप्तमी रवि योग : 12 वर्ष बाद भगवान सूर्य की पूजा का बना अद्भुत योग, इस मंत्र से भगवान भाष्‍कर को दे अर्घ्‍य

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 01:30 AM (IST)

    अचला सप्तमी रवि योग : बरहट, जमुई के पत्नेश्वर धाम स्थित सूर्य मंदिर में 25 जनवरी को अचला सप्तमी पर भव्य सूर्यपूजन समारोह होगा। 12 साल बाद रवि योग का द ...और पढ़ें

    अचला सप्तमी रवि योग : जमुई के पत्नेश्वर धाम मंदिर परिसर में किउल नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर।

    अचला सप्तमी रवि योग : जमुई के पत्नेश्वर धाम मंदिर परिसर में किउल नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर।

    संवाद सूत्र, बरहट (जमुई)। अचला सप्तमी रवि योग : जिले के प्रसिद्ध पत्नेश्वर धाम मंदिर परिसर में किउल नदी के तट पर स्थित सूर्य मंदिर प्रांगण में सूर्यपूजन समारोह का आयोजन 25 जनवरी को किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सूर्य मंदिर को आकर्षक रंग-रोगन एवं विद्युत सज्जा से सजाया गया है जो श्रद्धालुओं का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच रहा है। सूर्य मंदिर के व्यवस्थापक अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि सूर्यपूजन समारोह अचला सप्तमी के पावन अवसर पर किया जाता है।

    पत्नेश्वर धाम में 25 जनवरी को होगा भव्य सूर्यपूजन समारोह

    मान्यता है कि इसी दिन भगवान सूर्य का प्राकट्य हुआ था। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बिहार और झारखंड के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सूर्यपूजन में भाग लेने पहुंचेंगे। इस वर्ष पूजन के मुख्य जजमान रंजीत कुमार मिश्र (वैद्य जी) होंगे। विद्वान पंडित मनोहर आचार्य ने बताया कि 12 वर्षों के बाद इस बार अचला सप्तमी के दिन रवि योग का संयोग बन रहा है जो अत्यंत कल्याणकारी माना जा रहा है।

    किउल नदी तट स्थित सूर्य मंदिर आकर्षक रोशनी से सजा

    मान्यता के अनुसार, सूर्यपूजन के दिन उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के सात जन्मों के पापों का हरण होता है। पूजन समारोह में झंझारपुर सिविल कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार मिश्र की भी उपस्थिति रहेगी। इस पर्व को आरोग्य सप्तमी, सूर्य सप्तमी, विधान सप्तमी, चंद्रभागा सप्तमी, भानु सप्तमी और अचला सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। आयोजकों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर पहुंचकर सूर्यदेव की उपासना करने की अपील की है।

    बिहार-झारखंड से जुटेंगे श्रद्धालु

    यहां काफी संख्‍या में श्रद्धालु आएंगे। ब‍िहार के अलावा झारखंड से भी काफी श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना है। इसकी यहां तैयारी कर ली गई है। प्रशासन भी काफी सक्र‍िय है। साथ ही पूजा समि‍ति‍ और स्‍थानीय स्‍वयंसेवी संगठन लगातार यहां कार्य कर रहे हैं। 

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    यह है मंत्र

    "ॐ सूर्याय नमः", "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः""ॐ घृणि सूर्याय नमः", 'ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।', जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम। तमोऽरिं सर्वपाप्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥