स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे फाटक के आसपास की जमीन पूरी तरह रेलवे की है, लेकिन कुछ लोगों ने धीरे-धीरे कब्जा कर वहां घर बना लिए हैं। इन अवैध निर्माणों के कारण न केवल रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि रेल परिचालन की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
रेलवे फाटक के पास बसे इन अवैध मकानों के कारण दृश्यता प्रभावित होती है, जिससे ट्रेनों की आवाजाही और फाटक संचालन में परेशानी आती है। स्थानीय नागरिकों ने कई बार इस समस्या को लेकर शिकायत की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिल सका है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इस मामले में आरपीएफ प्रभारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि उन्हें मखदुमपुर रेलवे फाटक के समीप रेलवे भूमि पर अतिक्रमण की सूचना मिली है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जबरन रेलवे की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि आरपीएफ की ओर से कब्जाधारियों को चेतावनी दी गई है कि वे जल्द से जल्द स्वेच्छा से जमीन खाली कर दें।
आरपीएफ प्रभारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रेलवे की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि तय समय के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने के लिए शीघ्र अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ चेतावनी से काम नहीं चलेगा। वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए सख्त और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन और आरपीएफ इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाते हैं, क्योंकि पटना–गया जैसे महत्वपूर्ण रेलखंड पर सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा गंभीर होता जा रहा है।