जहानाबाद में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध बेअसर: खुलेआम हो रही बिक्री, रोजाना निकल रहा 4-5 क्विंटल कचरा
जहानाबाद में सिंगल यूज पॉलीथिन पर प्रतिबंध बेअसर है, जिससे रोजाना भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। बाजारों और गलियों में इसका खुलेआम इस्तेम ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जिले में सिंगल यूज़ पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद इसका इस्तेमाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों व हाट-बाजारों तक प्रतिबंधित प्लास्टिक थैलियों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।शहर के नालों में फंसी पॉलीथिन और जगह-जगह लगे कचरे के ढेर इस बात का प्रमाण हैं कि प्रतिबंध का असर नगण्य है। जल निकासी व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, जिसके कारण हल्की बारिश में भी सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन जाती है।
सफाई के दौरान मिलती हैं सबसे ज्यादा थैलियां
सफाईकर्मियों का कहना है कि नालों की सफाई के दौरान सबसे अधिक मात्रा में पतली प्लास्टिक थैलियां ही निकलती हैं, जिससे सफाई कार्य भी प्रभावित होता है।आंकड़ों के अनुसार, जिले में प्रतिदिन लगभग चार से पांच क्विंटल पॉलीथिन की खपत हो रही है, जबकि अकेले शहर में ही करीब पांच क्विंटल प्लास्टिक कचरा निकल रहा है।
किराना दुकानों, सब्जी मंडियों, मिठाई दुकानों और फुटपाथ विक्रेताओं द्वारा सस्ते विकल्प के चलते प्लास्टिक थैलियों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। ग्राहकों की मांग भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है, जिससे कपड़े या कागज के बैग का इस्तेमाल सीमित रह गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। वहां न तो नियमित जांच होती है और न ही किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है।
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खुलेआम हो रही प्रतिबंधित पॉलीथिन की बिक्री
प्रतिबंधित पॉलीथिन की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की कमी है और लोगों में कानून का भय भी नहीं है।पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीथिन का बढ़ता उपयोग न केवल शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बिगाड़ रहा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। खेतों में फेंकी गई प्लास्टिक लंबे समय तक नष्ट नहीं होती, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
कचरे के साथ पॉलीथिन भी निगल रहे पशु
इसके अलावा, पशु कचरे के साथ पॉलीथिन निगल लेते हैं, जिससे उनकी जान तक चली जाती है।इधर, नगर परिषद अध्यक्ष रूपा देवी ने शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर नगर विकास विभाग को पत्र भेजा है। सशक्त स्थायी समिति की बैठक में निर्णय लेते हुए सफाई एजेंसी का अनुबंध रद्द कर दिया गया है। साथ ही, कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में एजेंसी से राशि की वसूली के लिए भी पत्राचार किया गया है।
इसके बावजूद शहर में कचरे की समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ठोस और स्थायी कार्रवाई की मांग की है, ताकि पॉलीथिन के उपयोग पर प्रभावी रोक लग सके और शहर को स्वच्छ बनाया जा सके।