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    सच्चे मन से चढ़ाइए जल, औघड़दानी महादेव पूरी करेंगे मनोकामना! मीरगंज का यह प्राचीन मंदिर है आस्था का बड़ा केंद्र

    By valmiki giriEdited By: Radha Krishna
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 06:02 PM (IST)

    गोपालगंज के मीरगंज में स्थित प्राचीन औघड़दानी महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। यहां सच्चे मन से जल चढ़ाने पर मनोकामनाएं पूरी होती ...और पढ़ें

    HighLights

    1. मीरगंज का औघड़दानी महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र।

    2. सच्चे मन से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं होती हैं पूरी।

    3. सावन में बाणगंगा जल से अभिषेक की पुरानी परंपरा।

    जागरण संवाददाता, गोपालगंज। जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर मीरगंज नगर में स्थित प्राचीन औघड़दानी महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। हथुआ रेलवे स्टेशन से पोस्ट ऑफिस जाने वाली सड़क पर डाकघर के समीप यह प्राचीन शिव मंदिर स्थित है।

    सालभर यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। स्थानीय लोगों के बीच मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

    मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। यही विश्वास इस मंदिर को मीरगंज और आसपास के श्रद्धालुओं के लिए खास बनाता है।

    सावन में बदल जाता है मंदिर का पूरा माहौल

    सावन का महीना आते ही औघड़दानी महादेव मंदिर की धार्मिक छटा और बढ़ जाती है। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है।

    भोलेनाथ के जयकारों और पूजा-पाठ से आसपास का वातावरण भक्तिमय हो उठता है। श्रद्धालु भगवान शिव को जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।

    सावन में जलाभिषेक को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। इस दौरान मंदिर में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी बढ़ जाती है।

    बाणगंगा से जल लाकर अभिषेक की पुरानी परंपरा

    मंदिर के पुजारी विनोद कुमार व्यास के अनुसार यहां बाणगंगा से जल लाकर औघड़दानी महादेव का अभिषेक करने की परंपरा काफी पुरानी है।

    पीढ़ियों से श्रद्धालु इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाते आ रहे हैं। सावन में विशेष रूप से भक्त बाणगंगा का जल लेकर भगवान शिव के दरबार में पहुंचते हैं।

    इसके बाद विधि-विधान से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ पूजा की परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़ा धार्मिक संस्कार है। समय के साथ यह परंपरा मंदिर की पहचान का अहम हिस्सा बन गई है।

    आस्था के भरोसे पहुंचते हैं दूर-दूर से भक्त

    औघड़दानी महादेव मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    सावन में मंदिर का वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु भोलेनाथ से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

    कई भक्त अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना के बाद उसे भगवान शिव के चरणों में समर्पित करते हैं।
    मंदिर की धार्मिक मान्यताएं और पुरानी परंपराएं आज भी श्रद्धालुओं को यहां खींच लाती हैं।