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    गया में बिना मोटर लगाए डकार गए नल-जल योजना के ₹7.50 लाख, केवल चबूतरा बनाकर कागजों पर दिखाया खर्च

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 02:39 PM (IST)

    मोहनपुर प्रखंड की लाडू पंचायत में नल-जल योजना में 7.50 लाख रुपये की अनियमितता का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल चबूतरा बना है, मोटर नहीं लग ...और पढ़ें

    केवल चबूतरा बनाकर कागजों पर दिखाया खर्च

    केवल चबूतरा बनाकर कागजों पर दिखाया खर्च 

    HighLights

    1. नल-जल योजना में 7.50 लाख रुपये की अनियमितता का आरोप।

    2. केवल चबूतरा बना, मोटर नहीं लगी, पेयजल आपूर्ति ठप।

    3. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

    संवाद सूत्र, लाडू (मोहनपुर)। मोहनपुर प्रखंड की लाडू पंचायत के वार्ड संख्या दो में संचालित नल-जल योजना में अनियमितता का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जांच की मांग की है। 

    ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के लिए लगभग 7.50 लाख रुपये की राशि खर्च दिखा दी गई, जबकि स्थल पर केवल चबूतरे का निर्माण हुआ है। बोरिंग में मोटर नहीं लगाई गई है, जिससे लोगों को पेयजल का लाभ नहीं मिल रहा है।

    सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल 

    ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस स्थान पर चबूतरा बनाया गया है, वह वार्ड संख्या दो के बजाय वार्ड संख्या एक के क्षेत्र में आता है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन और सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। 

    लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

    योजना से जुड़े आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं

    इस संबंध में वार्ड सदस्य से संपर्क करने का प्रयास किया गया। वार्ड सदस्य के पति से बातचीत हुई। उन्होंने आरोपों को लेकर कहा, 'जो करना है कर लीजिए, जहां जाना है जाइए, हमें कोई दिक्कत नहीं है।' हालांकि उन्होंने योजना से जुड़े आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

    ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    पीएचईडी के कनीय अभियंता (जेई) गोरख प्रसाद ने बताया कि लाडू पंचायत के वार्ड संख्या-2 में नल-जल योजना के तहत पूर्व में फाउंडेशन, बोरिंग तथा कुछ हिस्सों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य कराया गया था। उक्त योजना पंचायत द्वारा पीएचईडी को हैंडओवर की गई है।

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    उन्होंने कहा कि इस कार्य पर कितनी राशि खर्च हुई, इसकी जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है। यह प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के स्तर पर जांच का विषय है।

    जेई ने बताया कि योजना को अब पीएचईडी के अधीन शामिल कर लिया गया है तथा स्थल का पुनः सर्वेक्षण कर आवश्यकतानुसार नए सिरे से कार्य कराया जाएगा।

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