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    चरवाहों को दिखाई दिया था विशाल शिवलिंग, राजा ने 1934 में बनवाया मंदिर; गया के हंसराज पहाड़ी का इतिहास

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 09:58 AM (IST)

    गया के वजीरगंज प्रखंड स्थित हसरा गांव की हंसराज पहाड़ी पर 95 वर्ष पुराना विशाल शिव मंदिर सावन में भक्तों का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यह स्वयंभू शिवलि ...और पढ़ें

    HighLights

    1. हंसराज पहाड़ी पर 95 वर्ष पुराना विशाल शिव मंदिर।

    2. स्वयंभू शिवलिंग 100 साल पहले चरवाहों को दिखा था।

    3. सावन पूर्णिमा पर भव्य श्रृंगार दर्शन और जलाभिषेक।

    रव‍िभूषण स‍िन्‍हा, वजीरगंज। गया के वजीरगंज प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हसरा गांव में अवस्थित हंसराज पहाड़ी पर करीब 95 वर्ष पुराना विशाल शिवमंदिर है।

    इसमें चार फीट का शिवलिंग स्थापित है। यहां शिवभक्तों को दर्शन के लिए हमेशा आना-जाना लगा रहता है। सावन में तो भक्‍तों का तांता लग जाता है। 

    चरवाहे को द‍िखा था श‍िवल‍िंग 

    इस पहाड़ी पर विशाल शिवलिंग को स्वयंभू कहा जाता है। करीब एक सौ साल पहले यह शिवलिंग क्षेत्र के चरवाहों को स्वतः दिखाई पड़ा था।

    तब कुछ वर्ष बाद सोनपुर के शासक जमींदार राजा निरशु हरि क्षेत्र भ्रमण के दरम्यान इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने कुछ मन्नतें रखकर वर्ष 1934 में विशाल मंदिर का निर्माण करा दिया।

    यहां कई छोटी-छोटी पहाड़ियों के श्रृंखला है। पहाड़ियों के बीच समतल भूमि पर उन्होंने तालाब एवं कुआं खुदवाए। बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर निर्माण काल से अब तक लगातार क्षेत्रीय लोगों को सुख शांति एवं प्रगति के राह मिलते रहे हैं।

    मंदिर की विशेषता

    श्रावण मास की विशेष आराधना को ले हसरा एवं आसपास के श्रद्धालुओं द्वारा तीन सौ मीटर इस ऊंचे पहाड़ी पर रोशनी की व्यवस्था की गई है। पहाड़ी के नीचे गहरी बोरिंग कराकर प्रबंधन के लोग मंदिर तक पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।

    श्रावण पूर्णिमा के दिन यहां भव्य श्रृंगार दर्शन कार्यक्रम होता है। शिवलिंग को पहले शुद्ध जल और फिर दूध से स्नान कराकर सोने-चांदी से बना नागनुमा मुकुट एवं अन्य तरह के श्रृंगार कराते हैं।

    दर्शन करने के लिए लोग रात भर जुटे रहते हैं। क्षेत्र के लोग कांवर लेकर बासुकीनाथ से जल उठाकर पूर्णिमा के दिन यहां चढ़ाने पहुंचते है।

    Jiwal

    यहां आराधना करने से सुख शांति तो मिलती ही है, लोगों की मन्नते पूरी होती है। पूरे परिसर का वातावरण बिल्कुल प्रदूषणरहित और रमणीक है। जब भी हम यहां पहुंचते हैं मन शुद्ध और शांत हो जाता है।

    जीवल प्रसाद, श्रद्धालु

    Pandit

    सावन के महीने में दूर दूर के लोग महादेव की आराधना करने आते हैं। महिला, पुरुष, बच्चे, अमीर-गरीब सभी बिना किसी भेदभाव के आराधना करते हैं। हसरा के ग्रामीण श्रद्धालुओं के लिए सभी प्रकार के आवश्यक सुविधाएं एवं सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हैं।
    रंजीत पांडे, पुजारी