नेपाल त्रासदी : सूखने लगीं बूढ़ी आंखें... न तीनों बेटे आए, न सलामती की खबर
मोतिहारी के केसरिया से नेपाल त्रासदी में लापता तीन भाइयों का परिवार 13 दिनों से उनकी वापसी का इंतजार कर ...और पढ़ें

नेपाल त्रासदी में लापता तीन बेटों का 13 दिन से इंतजार।
HighLights
मोतिहारी के तीन भाई नेपाल त्रासदी में लापता।
परिवार 13 दिनों से कर रहा वापसी का इंतजार।
रसुवा हाइड्रो प्लांट में काम करते थे तीनों।
संजय कुमार सिंह, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। घर के दरवाजे पर टिकी आंखें। हाथ में मोबाइल... दिल में जिगर के टुकड़ों के लौटने की उम्मीद। नेपाल त्रासदी में लापता तीन होनहार बेटों का इंतजार एक परिवार पिछले 13 दिनों से ऐसे कर रहा, जैसे मानो कब वो आकर बोल दें हम आ गए।
त्रासदी के बाद लापता तीन भाई रामबाबू साह, मुनील कुमार और प्रमोद प्रसाद की अबतक कोई खबर नहीं मिली। जैसे-जैसे वक्त गुजर रहा उम्मीद ...! जब भी सेलफोन की घंटी बजती, स्वजन चौंक जाते।
उम्मीद तीनों की कुशलता की खबर पाने की। पर, जैसे ही कोई दूसरी सूचना मिलती, उम्मीद पर मायूसी भारी हो जाती है। बारह दिनों से आती-जाती उम्मीद के बीच लगातार आंसू बहा रहे युवा बेटों के माता-पिता बूढ़ी आंखें सूखने लगी हैं, पर त्रासदी के बीच 13वें दिन तक न बेटे लौटे, नहीं उनकी जिंदगी की खबर न आई।
मुनील कुमार व प्रमोद प्रसाद के पिता कृष्णा प्रसाद साह अपनी पत्नी के साथ अपलक दरवाजे की ओर देखते रहते हैं। कभी एक-दूसरे का चेहरा देखते हैं। घर में पसरा सन्नाटा उनके दर्द को और गहरा कर देता है।
स्वजन अब भी खुद को यह भरोसा दिला रहे हैं कि तीनों सुरक्षित होंगे। कृष्णा कहते हैं- किसी न किसी माध्यम से उनकी खबर जरूर आएगी। अभी भी तो लोग बिजली परियोजनाओं के टनल से निकल रहे हैं।
बेटों की सुरक्षित वापसी के लिए ग्रामीण कर रहे प्रार्थना
एक परिवार के इस दर्द में जगीराहां गांव भी शामिल है। ग्रामीण लगातार लापता लोगों के घर पहुंचकर स्वजन को ढांढस बंधा रहे हैं। तीन भाई दो सहोदर व एक चचेरे की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रह।
ग्रामीणों ने प्रशासन से भी उनकी तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने और स्वजनों को शीघ्र जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। लोग कहते उम्मीद कायम है- शायद किसी दिन अचानक तीनों भाई सामने खड़े हों और घर में फिर से खुशियां लौट आएं।
रसुवा हाइड्रो प्लांट में पांच साल से करते थे काम, तबाही से पहले हुई थी बात
यहां बता दें कि रामबाबू साह, मुनील कुमार एवं प्रमोद प्रसाद नेपाल के रसुवा स्थित एंडिट हाइड्रो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के हाइड्रो प्लांट में पिछले पांच वर्षों से काम करते थे। विगत 26 अगस्त को उनसे स्वजनों की बातचीत हुई थी। इसके बाद से सभी के मोबाइल फोन बंद हैं।
याद रहे कि नेपाल की भोटेकोशी व त्रिशूली नदी में 26 अगस्त को आई प्रलंकारी बाढ़ में यहां के रसुवा, नुवाकोट व धादिंग में भारी क्षति हुई है। बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। रसुवा इस तबाही का केंद्र रहा है।
वहीं पर केसरिया के तीनों युवक कार्यरत थे। इस बीच विगत 30 अगस्त को बीडीओ, सीओ एवं थानाध्यक्ष ने स्वजनों से मिलकर उन्हें हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया था।
