विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार में जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम बदले, एक वर्ष बाद रजिस्ट्रेशन के लिए SDM या DM की मंजूरी जरूरी

Published: Wed, 07 Oct 2026 04:09 PM (GMT+05:30)

Bihar Birth Certificate New Rules: बिहार सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और फर्जीवाड़ा मुक्त हो सके।

वर्ष 2026 के नए संशोधन ने इस व्यवस्था को दो स्तरों में बांटकर पहले से अधिक सख्त बना दिया है।

वर्ष 2026 के नए संशोधन ने इस व्यवस्था को दो स्तरों में बांटकर पहले से अधिक सख्त बना दिया है।

HighLights

  1. जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अब अधिक पारदर्शी बनाया गया।

  2. एक वर्ष बाद पंजीकरण हेतु DM/SDM की मंजूरी आवश्यक।

  3. दो वर्ष बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही पंजीकरण।

संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Bihar Birth Death Registration Rules: नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने के उद्देश्य से बड़ा बदलाव किया गया है।

केंद्र सरकार के निर्देश पर बिहार सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।

कानून में बड़े बदलाव

यह नया कानून एक अक्टूबर 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुका है। पहले केवल 30 दिन तक सामान्य पंजीकरण और एक साल तक की देरी पर जिला रजिस्ट्रार की अनुमति से प्रमाण पत्र निर्गत हो जाता था। लेकिन वर्ष 2026 के नए संशोधन ने इस व्यवस्था को दो स्तरों में बांटकर पहले से अधिक सख्त बना दिया है।

अधिकारियों की लिखित मंजूरी

स्थानीय नगर निगम और प्रखंड कार्यालयों को भी नए नियमों के अनुसार ही आवेदन स्वीकार करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

जारी अधिसूचना के मुताबिक यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण अब विशेष प्रक्रिया के तहत ही होगा।

इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश की आवश्यकता होगी।

सत्यता जांच और शुल्क

संबंधित अधिकारी पहले घटना की सत्यता का पूरा सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देंगे।

वहीं यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल बीत जाने के बाद दी जाती है, तो मामला और अधिक सख्त हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में केवल अधिकार क्षेत्र वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही पंजीकरण की कार्रवाई की जा सकेगी।

जन्म और मृत्यु पंजीकरण क्यों जरूरी

भारत में नागरिकों को विभिन्न मौकों पर अपनी नागरिकता प्रमाणित करने के लिए विभिन्न दस्तावेज की जरूरत होती है। जन्म प्रमाण पत्र उनमें एक है। यह व्यक्ति के जन्म स्थान, तारीख और नागरिकता को कानूनी रूप से प्रमाणित करता है। विभिन्न प्रकारण की सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए यह जरूरी है। 
 
इसी तरह से मृत्यु प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति के निधन की पुष्टि के लिए जरूरी होता है। इससे सरकार को जनसंख्या के आंकड़ों को अपडेट करने में मदद मिलती है। 

इसकी कहां-कहां जरूरत पड़ती है?

जन्म प्रमाण पत्र (Single Proof Document):

  • स्कूल या कॉलेज में प्रवेश
  • पासपोर्ट, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाने में
  • मतदाता सूची (Voter ID) में नाम जुड़वाने में
  • सरकारी या निजी नौकरी में नियुक्ति के समय
  • विवाह का पंजीकरण करवाने के लिए

मृत्यु प्रमाण पत्र:

  • संपत्ति और वसीयत के हस्तांतरण (Mutation/Inheritance) में
  • बैंक खाते, एफडी, शेयर और म्यूचुअल फंड के क्लेम निपटाने में
  • जीवन बीमा (Life Insurance) का क्लेम हासिल करने में
  • पेंशन योजना का लाभ आश्रितों (पति/पत्नी) को दिलाने में
  • राशन कार्ड या मतदाता सूची से मृतक का नाम हटवाने में

जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की वर्तमान व्यवस्था

सामान्य रूप से किसी सरकारी या निजी अस्पताल, नगर निगम और ग्राम पंचायत के स्तर पर 'रजिस्ट्रार' नियुक्त होते हैं। उन्हें किसी जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के अंदर जानकारी देकर प्रमाण पत्र हासिल किया जा सकता है।

यह पूरी तरह से नि:शुल्क व्यवस्था है। किसी कारणवश उसके बाद जानकारी देने पर लेट फीस लगती है। इतना ही नहीं, लेट होने का उचित कारण बताते हुए मजिस्ट्रेट व रजिस्ट्रार से अनुमति लेनी होती है।

वर्तमान में सरकार ने जो बदलाव किया है वह 21 दिन के बाद होने वाले पंजीकरण के लिए ही किया है। इसमें गलत ढंग से रजिस्ट्रेशन की शिकायत मिल रही थी। इसके दुरुपयोग को देखते हुए सख्ती की गई है।

यह भी पढ़ें- 1 अक्टूबर से बदल रहे हैं नियम, 2 साल पुराने जन्म प्रमाणपत्र के लिए अब कोर्ट के चक्कर काटेगा आम आदमी!