Darbhanga News : अमेरिका में हुआ जाले के पहले इंजीनियर राम मोहन लाल का निधन
जाले के रतनपुर गांव के पहले इंजीनियर और वैज्ञानिक इं. राम मोहन लाल मल्लिक का 84 वर्ष की आयु में ...और पढ़ें

जाले के रतनपुर के इंजीनियर राममोहन लाल मल्लिक की फाइल फोटो।
HighLights
इं. राम मोहन लाल मल्लिक का 84 वर्ष की आयु में निधन।
रतनपुर गांव के पहले इंजीनियर, अमेरिका में बनाई अपनी पहचान।
इराक-कुवैत युद्ध में हजारों भारतीयों की मदद की थी।
संवाद सहयोगी, जाले (दरभंगा)। रतनपुर गांव की मिट्टी से निकलकर अमेरिका में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गांव के पहले इंजीनियर एवं विज्ञानी इं. राम मोहन लाल मल्लिक का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
ह्यूस्टन में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही जाले के रतनपुर सहित आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों ने उन्हें प्रतिभा, संघर्ष और सामाजिक सरोकारों के लिए याद किया।
मैट्रिक में जिले में रहे थे प्रथम
दो जनवरी 1942 को जन्मे राम मोहन लाल मल्लिक ने बेहद अभावों के बीच शिक्षा हासिल की। वर्ष 1958 की मैट्रिक परीक्षा में उन्होंने पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद वर्ष 1963 में मद्रास विश्वविद्यालय से केमिकल एवं माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
फ्लोर कार्पोरेशन में डायरेक्टर तक पहुंचे
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अमेरिका में करियर बनाया। ह्यूस्टन की फ्लोर कार्पोरेशन में काम करते हुए वे डायरेक्टर, प्रोसेस टेक्नोलॉजी के पद तक पहुंचे। तकनीकी क्षेत्र में उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं और अपनी अलग पहचान बनाई।
इराक-कुवैत युद्ध में भारतीयों की मदद
राम मोहन लाल मल्लिक केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे। वर्ष 1990 के इराक-कुवैत युद्ध के दौरान उन्होंने हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सामाजिक गतिविधियों से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। वर्ष 2003-04 में वे बिहार एसोसिएशन आफ नार्थ अमेरिका के अध्यक्ष रहे।
धार्मिक अध्ययन में भी थी रुचि
इंजीनियरिंग और सामाजिक गतिविधियों के साथ धार्मिक अध्ययन में भी उनकी गहरी रुचि थी। उनके स्वजन प्रवेश लाल मल्लिक ने बताया कि पांच सितंबर की दोपहर 3:30 बजे (भारतीय समयानुसार छह सितंबर रात 1:30 बजे) उनका निधन हुआ। परिवार में पत्नी सरस्वती देवी, पुत्र अरविंद और पुत्रियां हेमा व अलका हैं।
गांव से बना रहा जुड़ाव
करीब आठ वर्ष पहले वे परिवार के साथ गांव में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। करीब एक माह गांव में रहने के बाद अमेरिका लौट गए थे। बुधवार को अमेरिका में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
