होलिका दहन आज, जानें शुभ मुहूर्त, कथा और चंद्र ग्रहण से जुड़ी सावधानी
Holika Dahan 2026: ज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक चतुर्वेदी के अनुसार, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11:23 बजे से 12:40 बजे तक है। इस पर्व पर बुराई पर अच ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, दरभंगा। Holi Rituals India: कल 3 मार्च 2026 को लगने वाले वर्ष के पहले चंद्र ग्रहण से ठीक एक दिन पहले, आज 2 मार्च 2026 को देशभर में होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। ग्रहण की वजह से इस बार होलिका दहन का महत्व और भी अधिक माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक चतुर्वेदी के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी उपरांत पूर्णिमा, सोमवार 2 मार्च 2026 को “ॐ होलिकायै नम:” मंत्र के उच्चारण के साथ विधिपूर्वक होलिका दहन किया जाएगा।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
आज 2 मार्च 2026 को होलिका दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय रात्रि में निर्धारित है।
- होलिका दहन मुहूर्त: रात्रि 11:23 बजे से 12:40 बजे तक
- भद्रा काल: धार्मिक मान्यता है कि भद्रा में होलिका दहन वर्जित है। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद प्रदोष काल में दहन करना शुभ माना जाता है।
पौराणिक कथा और मान्यता
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसकी सबसे प्रसिद्ध कथा भक्त प्रहलाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप से जुड़ी है।
हिरण्यकश्यप एक अहंकारी असुर राजा था, जो स्वयं को भगवान मानता था। उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था।
हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। प्रहलाद को मारने के उद्देश्य से वह उसे गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित बच गए और वरदान का दुरुपयोग करने के कारण होलिका स्वयं भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है।
परंपराएं और रीति-रिवाज
होलिका दहन केवल लकड़ी जलाने की रस्म नहीं है, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक और सामाजिक परंपराएं जुड़ी हैं।
- मोहल्लों और गांवों में खुले स्थान पर लकड़ियाँ, उपले और सूखे पत्ते एकत्र किए जाते हैं। बीच में होली का डंडा गाड़ा जाता है, जो प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है।
- दहन से पहले महिलाएं रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, हल्दी और गुड़ से पूजन करती हैं। कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात बार लपेटा जाता है।
- नई फसल के रूप में गेहूं और चने की बालियां आग में सेंकी जाती हैं, जिसे ‘होला’ कहा जाता है। इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
- लोग इस अग्नि में अपने मन के क्रोध, लोभ और अहंकार को त्यागने का संकल्प लेते हैं।
- अगले दिन होलिका की राख को घर में छिड़कना या शरीर पर लगाना शुभ और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है।
ग्रहण के कारण विशेष सावधानी
चूंकि कल 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगने वाला है, इसलिए होलिका दहन के बाद लोग विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। कई घरों में आज रात ही भोजन बनाकर सुरक्षित रख लिया जाएगा और उसमें तुलसी के पत्ते डाल दिए जाएंगे, ताकि ग्रहण के प्रभाव से बचाव हो सके।
खबरें और भी
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण काल में भोजन और पूजा से जुड़े नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। इस कारण इस वर्ष होलिका दहन और भी अधिक आस्था और सावधानी के साथ मनाया जा रहा है।