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903 करोड़ से बक्सर पावर प्लांट के लिए बन रहा खास रेल कॉरिडोर, तीन साल में पूरा होगा निर्माण; क्या होगा फायदा?

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:00 AM (IST)

बक्सर ताप बिजली घर के लिए ₹903.01 करोड़ की लागत से समर्पित रेल कॉरिडोर का निर्माण तीन साल में पूरा ...और पढ़ें

बक्सर ताप बिजली घर के चौसा फ्रेट टर्मिनल पर रखा कोयला। जागरण आर्काइव

बक्सर ताप बिजली घर के चौसा फ्रेट टर्मिनल पर रखा कोयला। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. बक्सर बिजली घर को मिलेगा ₹903 करोड़ का रेल कॉरिडोर।

  2. तीन साल में पूरी होगी एलिवेटेड रेल लाइन परियोजना।

  3. कोयले की निर्बाध आपूर्ति से बढ़ेगी बिहार की ऊर्जा सुरक्षा।

शुभ नारायण पाठक, बक्सर। बिहार की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बक्सर ताप बिजली घर के लिए समर्पित रेल कारिडोर का निर्माण अगले तीन साल में पूरा होगा।

सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएन) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एसजेवीएन थर्मल प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) ने जिले के चौसा स्थित 1,320 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट के लिए रेल लाइन निर्माण का कार्य आदेश जारी कर दिया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को 903.01 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण करेगी। 36 महीने की समय-सीमा वाली इस परियोजना के पूरा होने से संयंत्र को वार्षिक 6.25 मिलियन टन कोयले की निर्बाध आपूर्ति होगी।

यहां से उत्पादित लगभग 9,828 मिलियन यूनिट बिजली में से 85 प्रतिशत यानी 1,120 मेगावाट सीधे बिहार को मिलेगी।

एलिवेटेड रेल ट्रैक के माध्यम से होगी निर्बाध कोयला आपूर्ति

इस परियोजना के तहत दानापुर रेल मंडल के चौसा रेलवे स्टेशन और पवनी कमरपुर हाल्ट के पास से मुख्य रेल लाइनों को सीधे पावर प्लांट परिसर से जोड़ा जाएगा।

इसके लिए एक स्थायी रेलवे साइडिंग और एलिवेटेड (एरियल) ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। यह एलिवेटेड रेल लाइन कम भूमि का उपयोग करते हुए स्थानीय आबादी को प्रभावित किए बिना मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगी।

बक्सर ताप बिजली घर की वर्तमान स्थिति और विकास यात्रा

लगभग 14 हजार करोड़ रुपए की संशोधित लागत से विकसित हो रहे इस सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट में 660-660 मेगावाट की दो अत्याधुनिक इकाइयां हैं।

इनमें से पहली इकाई (यूनिट-1) को अगस्त 2025 में ग्रिड से जोड़ा गया था, जिसने नवंबर 2025 में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया। वहीं, दूसरी इकाई (यूनिट-2) ने 31 अगस्त 2026 को लगातार 72 घंटे तक पूर्ण क्षमता पर सफल परीक्षण पूरा कर लिया है।

एसटीपीएल प्रबंधन ने परिसर में 800 मेगावाट की एक और इकाई (यूनिट-3) स्थापित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, जिससे संयंत्र की कुल क्षमता बढ़कर 2,120 मेगावाट हो जाएगी।

समर्पित रेल साइडिंग से मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ

स्थायी रेल साइडिंग बनने से सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की खदानों से कोयले की रेक सीधे प्लांट के ट्रैक हापर तक पहुंच सकेंगी और विद्युत-चालित मालगाड़ियां परिसर के अंदर ही अनलोडिंग करेंगी।

वर्तमान में चौसा स्थित फ्रेट टर्मिनल से ट्रकों द्वारा कोयला पहुंचाया जा रहा है, जिससे परिवहन लागत के साथ ही लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल और ट्रकों के धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है।

परिसर के अंदर रेल मार्ग पहले ही बनकर तैयार

बिजली घर परिसर के भीतर रेल संरचनाओं का विकास पहले ही हो चुका है। मालगाड़ियों के सुचारू संचालन और तीव्र कोयला अनलोडिंग के लिए आरआईटीईएस लिमिटेड ने मार्च 2019 से मई 2025 के दौरान लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक रेल नेटवर्क तैयार किया है।

इसमें मल्टी-लाइन यार्ड, आरसीसी ट्रैक हापर, सिग्नलिंग भवन और आरडीएसओ मानक के भारी कंक्रीट स्लीपर्स के साथ पटरियों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है।

इसका स्वचालित बॉटम-डिस्चार्ज सिस्टम चलती मालगाड़ी के निचले दरवाजे खोलकर महज कुछ ही मिनटों में पूरा कोयला ट्रैक हापर में डंप कर देता है।