नहीं लगाना पड़ेगा सरकारी दफ्तरों के चक्कर, अधिकारी खुद आएंगे गांव; भोजपुर में 19 मई से लगेंगे सहयोग शिविर
बिहार सरकार 19 मई से भोजपुर जिले की 42 पंचायतों में 'Sahyag Shivir' शुरू कर रही है, जहां अधिकारी गांव में ही जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे। ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, चरपोखरी (आरा)। सुशासन की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है, जिससे आम जनता और सरकार के बीच की दूरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
जरूरतमंद ग्रामीणों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए न तो प्रखंड कार्यालयों की सीढ़ियां घिसनी पड़ेंगी और न ही जिला मुख्यालय या राजधानी के चक्कर काटने पड़ेंगे, क्योंकि सरकार का पूरा तंत्र खुद चलकर उनके द्वार आ रहा है। इसी कड़ी में आगामी 19 मई से भोजपुर जिले की चयनित 42 पंचायतों में सहयोग शिविर प्रारंभ होने जा रहा है।
निर्देश दिया गया है कि जनता की समस्याओं का समाधान बंद कमरों के बजाय गांव की चौपाल पर होना चाहिए। इसी विजन को धरातल पर उतारते हुए भोजपुर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने सहयोग शिविर की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है।
जिलाधिकारी ने ज़ूम मीटिंग के जरिए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस शिविर का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं बल्कि उनका ऑन-द-स्पॉट और पारदर्शी निष्पादन सुनिश्चित करना है।
हालांकि यह अभियान पूरे भोजपुर जिले में व्यापक स्तर पर चलेगा लेकिन चरपोखरी प्रखंड की कोयल पंचायत में होने वाले आयोजन को लेकर स्थानीय स्तर पर इंतज़ार है।
एक छत के नीचे होंगे सारे काम
19 मई को आयोजित होने वाले इस शिविर में राजस्व, भूमि सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे विभागों के अधिकारी एक ही छत के नीचे मौजूद रहेंगे।
भोजपुर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि शिविर से 30 दिन पूर्व ही आवेदन संकलित कर लिए जाएं ताकि आयोजन के दिन अधिकांश मामलों में सीधे रिजल्ट दिया जा सके।
हालांकि, ऐसे शिविर पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन पहली बार नये मुख्यमंत्री के कार्यकाल में यह पहल हुई है और इसके परिणाम को लेकर ग्रामीणों की भी नजर बनी रहेगी।
आम जनता को क्या होगा सीधा लाभ?
- जमीन की रसीद, दाखिल-खारिज, वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड और बिजली बिल जैसी समस्याओं के लिए अलग-अलग दफ्तर नहीं दौड़ना होगा।
- गांव में ही शिविर लगने से ग्रामीणों के आने-जाने का समय और पैसा दोनों बचेगा।
- जिला और प्रखंड स्तर के बड़े अधिकारी सीधे जनता की बात सुनेंगे, जिससे काम में लापरवाही की गुंजाइश नहीं रहेगी।
- कई मामलों में अधिकारियों को मौके पर ही फैसला लेकर समस्या खत्म करने का आदेश दिया गया है।