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'भोजपुर प्रशासन के 35 लोगों के सामने हुई हत्या...', भारत तिवारी एनकाउंटर केस में गवाह का दावा

Published: Mon, 13 Jul 2026 03:54 PM (IST)

भोजपुर के शाहपुर में भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच में दूसरे दिन भाभी सुमन देवी समेत दो ...और पढ़ें

भारत तिवारी एनकाउंटर जांच: भाभी और दो गवाहों ने न्यायिक आयोग के सामने दिया बयान

भारत तिवारी एनकाउंटर जांच: भाभी और दो गवाहों ने न्यायिक आयोग के सामने दिया बयान

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जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले (Bharat Tiwari Encounter Case) की न्यायिक जांच के तहत सोमवार को दूसरे दिन भारत तिवारी की भाभी सुमन देवी समेत दो गवाहों सत्यनारायण चौधरी और मंटू कमकर ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया।

सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के न्यायाधीश एवं न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष तीनों गवाहों ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान आयोग ने उनसे करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की।

बयान दर्ज कराने के बाद भारत तिवारी की भाभी सुमन देवी ने कहा कि उन्होंने आयोग के समक्ष घटना से जुड़ी पूरी जानकारी दी है।

उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि मामले में जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की भूमिका रही, उसके संबंध में भी आयोग को जानकारी दी गई है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

वहीं, जवनिया निवासी गवाह सत्यनारायण चौधरी ने आयोग के समक्ष दावा किया कि भारत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन बाद में उसे करीब 50 मीटर दूर ले जाकर गोली मार दी गई।

उन्होंने बताया कि घटना के समय मौके पर प्रशासन के करीब 35 लोग मौजूद थे। आयोग ने उनसे लगभग आधे घंटे तक पूछताछ की।

इधर, गवाही के दौरान न्यायिक जांच आयोग कार्यालय परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। परिसर में आने-जाने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी रखी गई।

पहले माता-पिता का दर्ज हुआ था बयान

इससे पहले 11 जुलाई को भारत भूषण तिवारी की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था।

पत्रकारों से बातचीत में एसडीएम, डीएसपी थानेदार और एसटीएफ जवान पर गंभीर आरोप लगाया था। मृतक के अधिवक्ता विष्णुधर पांडेय के अनुसार, माता-पिता ने आयोग को घटना से जुड़ी अपनी जानकारी और अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखा था।

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