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अब चिड़ियाघर देखने के लिए पटना-कोलकाता जाने की जरूरत नहीं, भागलपुर में बनेगा हाइटेक जू

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:43 PM (IST)

पार्षद गोबिंद बनर्जी ने भागलपुर के जयप्रकाश उद्यान और सैंडिस कंपाउंड को आधुनिक वन्यजीव, चिड़ियाघर एवं जैव-विविधता केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

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HighLights

  1. पार्षद गोबिंद बनर्जी ने आधुनिक चिड़ियाघर और वन्यजीव केंद्र का प्रस्ताव दिया।

  2. जिला पदाधिकारी को जयप्रकाश उद्यान विकास पर संज्ञान लेने का निर्देश।

  3. उद्देश्य विश्वस्तरीय, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल वन्यजीव केंद्र बनाना है।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। सैंडिस कंपाउंड सह जयप्रकाश उद्यान परिसर में पूर्व के भांति लेकिन आधुनिक चिड़ियाघर के निर्माण को लेकर विभागों में पत्राचार किया था।

जिसके फलस्वरुप गुरुवार को ईमेल के माध्यम से पार्षद गोबिंद बनर्जी को जानकारी प्राप्त हुआ कि प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय से उपरोक्त विषय पर जिला पदाधिकारी को संज्ञान लेने के लिए निर्देशित किया गया है।

वार्ड 25 के पार्षद गोबिंद बनर्जी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अत्याधुनिक वन्यजीव, चिड़ियाघर एवं जैव-विविधता केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की है।

उन्होंने राज्य सरकार के स्तर से वन एवं पर्यावरण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, पर्यटन विभाग और संबंधित वन्यजीव विशेषज्ञ संस्थाओं के माध्यम से स्थल सर्वेक्षण, व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत डीपीआर तैयार कराने की दिशा में पहल करने का अनुरोध किया है।

पार्षद ने कहा है कि जयप्रकाश उद्यान परिसर में करीब 30 वर्ष पहले तक चिड़ियाघर हुआ करता था। यह भागलपुर सहित आसपास के जिलों के लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र था।

विभिन्न कारणों से समय के साथ चिड़ियाघर समाप्त हो गया। वर्तमान में भागलपुर और आसपास के विस्तृत क्षेत्र में ऐसा कोई प्रमुख चिड़ियाघर नहीं है। लोगों को केवल चिड़ियाघर देखने के लिए पटना अथवा कोलकाता जैसे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि भागलपुर स्मार्ट सिटी योजना के तहत जयप्रकाश उद्यान और सैंडिस कंपाउंड क्षेत्र में शहर की जनता अथवा 51 वार्डों के प्रतिनिधियों के परामर्श के बिना सरकारी पदाधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जो पूरी तरह व्यर्थ हैं। उन्होंने अब इन क्षेत्रों के बेहतर उपयोग के लिए दीर्घकालीन योजना बनाने का सुझाव दिया है।

मास्टर प्लान के तहत वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास

गोबिंद बनर्जी ने विशेषज्ञों से आधुनिक मास्टर प्लान तैयार कराने का सुझाव दिया है। इसके तहत बाघ, शेर, तेंदुआ, चीता, हाथी, जिराफ, जेब्रा, गैंडा, दरियाई घोड़ा, भालू, लकड़बग्घा, मगरमच्छ, ऊंट, गोरिल्ला, विभिन्न प्रजातियों के विदेशी बंदर, साहील, खरगोश सहित अन्य उपयुक्त वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित आवास विकसित किए जा सकते हैं।

इसके अलावा मोर की विभिन्न प्रजातियां, सारस, राजहंस, गिद्ध, गरुड़, शुतुरमुर्ग, मकाउ, काकातुआ और विभिन्न प्रकार के तोते समेत दुर्लभ पशु-पक्षियों को भी वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त और वैधानिक अनुमति के आधार पर परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव है।

आधुनिक मछलीघर, सरीसृप गृह, मगरमच्छ क्षेत्र, पक्षी विहार और जलीय जीवों के लिए विशेष जल क्षेत्र विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।

वहीं, सैंडिस कंपाउंड के वर्तमान क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और स्थानीय बच्चों के खेल मैदानों को यथावत रखते हुए शेष प्राकृतिक जंगल एवं हरित क्षेत्र में हिरण, बारहसिंगा, नीलगाय जैसे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण विकसित करने की बात कही गई है।

पार्षद ने कहा कि उद्देश्य केवल पुराने चिड़ियाघर को पुन: स्थापित करना नहीं, बल्कि पुरानी स्मृतियों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर वैज्ञानिक, पर्यावरण-अनुकूल और विश्वस्तरीय वन्यजीव केंद्र बनाना होना चाहिए।

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