जब प्रवासी पक्षियों ने नहीं भरी उड़ान… जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत, सर्दियों के बाद भी नहीं लौटीं, भागलपुर जगतपुर की झील में रहस्य गहराया
भागलपुर की जगतपुर झील में इस वर्ष प्रवासी पक्षी अप्रैल के मध्य तक भी मौजूद हैं, जो सामान्यतः मार्च तक लौट जाते हैं। पक्षी विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन ...और पढ़ें

अप्रैल में भी गूंज रही चिड़ियों की चहचहाहट, जगतपुर झील बना शोध का केंद
HighLights
जगतपुर झील में प्रवासी पक्षी अप्रैल तक रुके।
विशेषज्ञों ने इसे जलवायु परिवर्तन का संकेत बताया।
झील की जैव विविधता में सुधार का भी प्रमाण।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। आमतौर पर शरद ऋतु में हजारों प्रवासी पक्षियों का आश्रय स्थल बनने वाली जगतपुर झील इस वर्ष एक असामान्य कारण से चर्चा में है। जहां हर साल नवंबर से आने वाले प्रवासी पक्षी मार्च के अंत तक अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं, वहीं इस बार अप्रैल माह के मध्य में भी कई विदेशी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस असामान्य स्थिति ने पक्षी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की चिंता व उत्सुकता दोनों बढ़ा दी है।
अप्रैल में भी झील में दिख रहे विदेशी पक्षी
पक्षी विशेषज्ञ एवं जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डी.एन. चौधरी के अनुसार, जगतपुर वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों का आगमन हर वर्ष नवंबर से शुरू होता है और वे सर्दियों के दौरान यहां प्रवास करते हैं। सामान्यतः मार्च तक ये पक्षी अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं, लेकिन इस वर्ष स्थिति अलग है। अप्रैल के मध्य में भी गार्गेनी (चैता), ब्लैक-टेल्ड गॉडविट (गूदेरा), आस्प्रे (मछरगां) और कॉमन सैंडपाइपर जैसे पक्षी झील में भोजन की तलाश करते देखे गए हैं।
शोध के दौरान दर्ज हुई असामान्य उपस्थिति
डॉ. चौधरी के शोध छात्र जय कुमार जय, जो जगतपुर झील की पारिस्थितिकी पर अध्ययन कर रहे हैं, ने नियमित सर्वेक्षण के दौरान इन पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष स्थानीय प्रवासी प्रजाति फलवस व्हिसलिंग डक (बड़ी शिल्ही) भी अच्छी संख्या में देखी गई है। जय कुमार ने इन पक्षियों को कैमरे में भी कैद किया है, जो उनके शोध के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बनेंगे।

भोजन की उपलब्धता बना प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि झील में भोजन की प्रचुरता और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियां पक्षियों को यहां अधिक समय तक रोक रही हैं। सामान्य परिस्थितियों में इन प्रवासी पक्षियों को समय पर अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाना चाहिए, ताकि वे वहां प्रजनन कर सकें। प्रवास में देरी उनके प्रजनन चक्र को प्रभावित कर सकती है।
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जलवायु परिवर्तन के संकेत
डॉ. डी.एन. चौधरी, जो पिछले 30 वर्षों से पक्षियों के शोध और संरक्षण से जुड़े हैं, का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल में असामयिक वर्षा और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण पक्षियों का प्रवास काल बढ़ गया है। कोरोना काल में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी, जब पक्षियों की वापसी में देरी हुई थी। कुछ वर्ष पहले इन्हें मई माह तक भी देखा गया था, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
जैव विविधता का सकारात्मक संकेत भी
शोधार्थी जय कुमार जय का कहना है कि प्रवासी बत्तख प्रजातियों का अप्रैल में भी दिखाई देना इस वेटलैंड की बेहतर होती जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन का संकेत है। उन्होंने जगतपुर वेटलैंड को प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बताया और आगे और गहन अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।
अन्य वेटलैंड में भी दिखी हलचल
इसी तरह भागलपुर के बिहपुर प्रखंड स्थित घटोरा वेटलैंड में भी प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र भी धीरे-धीरे पक्षियों के लिए अनुकूल आवास के रूप में विकसित हो रहा है।
शोध जारी, भविष्य पर नजर
कुल मिलाकर जगतपुर झील और आसपास के वेटलैंड में अप्रैल माह में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी जहां एक ओर समृद्ध जैव विविधता का संकेत देती है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों की ओर भी इशारा करती है। फिलहाल इस असामान्य प्रवृत्ति पर शोध और सर्वेक्षण जारी है, जिससे आने वाले समय में और स्पष्ट निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद है।