अनोखी दोस्ती: दिव्यांग दोस्त को कंधे पर बिठाकर 105 KM पैदल बाबाधाम जा रहा दीपक; 8 साल से निभा रहा यह निस्वार्थ फर्ज
दीपक कनौजिया अपने दिव्यांग दोस्त प्रमोद पांडे को कंधे पर बिठाकर सुल्तानगंज से देवघर तक 105 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। यह सच्ची दोस्ती ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी दीपक कनौजिया अपने पैरों से लाचार दोस्त प्रमोद पांडे को कंधे पर उठाकर तय कर रहे सुल्तानगंज से देवघर की कठिन यात्रा
HighLights
दीपक दिव्यांग दोस्त प्रमोद को कंधे पर लेकर यात्रा कर रहे।
सुल्तानगंज से देवघर तक 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा।
पिछले आठ सालों से निभा रहे सच्ची दोस्ती का फर्ज।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। आस्था की राह में दूरी मायने नहीं रखती और सच्ची दोस्ती हो तो शारीरिक मजबूरियां भी कभी रास्ता नहीं रोक पातीं। श्रावणी मेले में अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) से देवघर की ओर बढ़ रहे कांवड़ियों के सैलाब के बीच जौनपुर के दो बचपन के दोस्तों की यह कहानी हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।
प्रमोद पांडे पैरों से चलने में असमर्थ हैं, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचने की उनकी तीव्र इच्छा को उनके जिगरी दोस्त दीपक कनौजिया ने अपने कंधों का मजबूत सहारा दे दिया है। दीपक अपने दिव्यांग दोस्त को कंधे पर बिठाकर सुल्तानगंज से देवघर की 105 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा पर मुस्कुराते हुए निकल पड़े हैं।
काशी विश्वनाथ से शुरू हुआ सफर, 6 दिन में पहुंचेंगे देवघर
दोनों दोस्त उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं। बाबा बैद्यनाथ की इस पावन यात्रा से पहले दोनों जौनपुर से काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने के बाद ट्रेन से अजगैवीनाथ धाम आए।
अब दोनों अजगैवीनाथ धाम से पैदल देवघर की यात्रा कर रहे हैं। लगभग छह दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर वे देवघर में बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद वहां से वाहन द्वारा बासुकीनाथ धाम जाकर बाबा बासुकीनाथ के दर्शन करेंगे।
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8 साल से निभा रहे दोस्ती का फर्ज, रास्ते में लोग कर रहे नमन
दीपक बताते हैं कि प्रमोद बचपन से ही उनके सबसे प्रिय मित्र हैं। सावन के महीने में जब भी अन्य कांवड़ियों को देवघर जाते देखते, तो प्रमोद के मन में भी महादेव के दर्शन की इच्छा जगती थी, लेकिन लाचारी आड़े आ जाती थी। दोस्त की इसी तड़प को देखकर दीपक ने आठ साल पहले अपने कंधों को ही उनकी राह बना दिया।
पिछले आठ वर्षों से हर सावन में दीपक अपने दोस्त को कंधे पर लेकर देवघर पहुंचते हैं। रास्ते में जब अन्य कांवड़िया और श्रद्धालु दीपक के कंधे पर प्रमोद को देखते हैं, तो नतमस्तक हो जाते हैं।
न कोई प्रदर्शन, बस महादेव की भक्ति और सच्ची मित्रता
दीपक के लिए दोस्त को कंधे पर उठाना कोई बोझ नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा दिया गया सौभाग्य है। वह कहते हैं कि वे बाबा से बस यही मांगते हैं कि उनके दोस्त के जीवन में कभी कोई दुख न आए। वहीं प्रमोद भी अपने दोस्त दीपक की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए भोलेनाथ से प्रार्थना करते हैं।