IG, DIG और SP को मिलेगी मजिस्ट्रेट की पावर; ऑन द स्पॉट होंगे फैसले, बिहार में BNSS कानून के तहत तैयारी अंतिम चरण में
बिहार सरकार राज्य में विधि-व्यवस्था मजबूत करने के लिए IG, DIG, SSP और SP को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने जा रही है। इससे पुलिस अधिकारी BNSS 2 ...और पढ़ें
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आईजी, डीआईजी और एसएसपी को अपनी अदालत लगाने, कर्फ्यू, बांड भरवाने व अतिक्रमण हटाने का मिलेगा कानूनी अधिकार
HighLights
पुलिस अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां मिलेंगी।
आपात स्थितियों में मौके पर ही त्वरित निर्णय संभव।
BNSS 2023 के तहत सार्वजनिक व्यवस्था हेतु अधिकार।
भागलपुर। बिहार में विधि-व्यवस्था (Law and Order) को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाने जा रही है। सरकार प्रदेश के सभी जोन और रेंज के आईजी (IG), डीआईजी (DIG) तथा जिलों में तैनात एसएसपी (SSP) व एसपी (SP) को मजिस्ट्रेट की शक्तियां यानी कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) का अधिकार देने की अंतिम चरण की कवायद में जुट गई है।
इस व्यवस्था के लागू होते ही भागलपुर समेत राज्यभर के वरीय पुलिस अधिकारियों को पुलिसिंग के साथ-साथ मजिस्ट्रेट वाले कानूनी अधिकार भी मिल जाएंगे। इससे किसी भी आपात स्थिति या फील्ड में मौके पर ही 'ऑन द स्पॉट' त्वरित फैसले लिए जा सकेंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार त्योहार, चुनाव, जन-आंदोलन और वीआईपी (VIP) मूवमेंट के दौरान तत्काल निर्णय लेने के लिए यह पावर मिलना बेहद आवश्यक था, क्योंकि वर्तमान व्यवस्था में डीएम या जिला प्रशासन से अनुमति लेने में समय लगता था।
BNSS 2023 के तहत पुलिस अधिकारियों को मिलेंगे ये 4 बड़े अधिकार
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के तहत पुलिस के इन वरीय अधिकारियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण शक्तियां सौंपी जाएंगी:
निषेधाज्ञा व पाबंदी: किसी भी क्षेत्र में भीड़ एकत्र होने पर रोक, हथियार ले जाने पर प्रतिबंध और शांति भंग की आशंका पर तत्काल आधिकारिक आदेश जारी करना।
बांड भरवाना व हिरासत: उपद्रवियों, असमाजिक तत्वों व संदिग्धों से शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाना और इनकार करने पर जेल/हिरासत में भेजने का आदेश देना।
सार्वजनिक उपद्रव व अतिक्रमण पर कार्रवाई: सड़क जाम, अवैध कब्जा, नाली अवरुद्ध करने और जर्जर व खतरनाक भवनों को जमींदोज कराने का सीधा आदेश।
कर्फ्यू व जुलूस नियंत्रण: आवश्यकता पड़ने पर कर्फ्यू लगाना, जुलूसों का मार्ग (रूट) तय करना, लाउडस्पीकर पर रोक लगाना और जमीन विवाद में अस्थायी आदेश पारित करना।
घट जाएगा 'रिस्पॉन्स टाइम', जिला प्रशासन और पुलिस दोनों को होगा फायदा
पुलिस मुख्यालय के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि दुर्गा पूजा, मुहर्रम, छठ और सरस्वती पूजा के दौरान जिलों में भारी भीड़ होती है और सीमावर्ती इलाके काफी संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में जिलाधिकारी (DM) और पुलिस कप्तान (SP) के बीच कागजी प्रक्रिया और फाइल मूवमेंट में वक्त जाया होता है।
अब मजिस्ट्रियल पावर मिलने से न केवल पुलिस का कमांड मजबूत होगा, बल्कि आपात स्थिति में 'रिस्पॉन्स टाइम' भी काफी घट जाएगा।
विशेषज्ञों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताई अपनी राय
कानूनी पहलू (विधि परामर्शी डॉ. राजेश कुमार तिवारी): "यह शक्ति स्थायी नहीं होती और विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है। एक ही अधिकारी के पास पुलिस और मजिस्ट्रेट दोनों की शक्ति होने से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।"
खबरें और भी
सामाजिक प्रभाव (रेडक्रॉस अध्यक्ष अशोक कुमार जीवराजिका): "इससे आम लोगों की शिकायतों का निपटारा तेजी से होगा। धरना, जुलूस और बाजारों में अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर तुरंत और कड़ा एक्शन संभव हो सकेगा।"