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रामायण-गीता का सार है मैथिलीशरण गुप्त रच‍ित भारत-भारती; स्वामी आगमानंद संपादित अमर कृति का विमोचन, VC व MLC भी आए

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:17 PM (IST)

Bharat Bharati Book Launch Bhagalpur : भागलपुर में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत-भारती' के नव संस्करण का विमोचन हुआ, जिसका ...और पढ़ें

Bharat Bharati Book Launch Bhagalpur : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कृति 'भारत-भारती' के नव संस्करण का भागलपुर में भव्य विमोचन

Bharat Bharati Book Launch Bhagalpur : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कृति 'भारत-भारती' के नव संस्करण का भागलपुर में भव्य विमोचन

HighLights

  1. भागलपुर में मैथिलीशरण गुप्त की 'भारत-भारती' का नव संस्करण विमोचित।

  2. स्वामी आगमानंद ने किया संपादन, कुलपति-एमएलसी रहे उपस्थित।

  3. पुस्तक सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति का प्रतीक, रामायण-गीता का सार।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bharat Bharati Book Launch Bhagalpur: भागलपुर के लोदीपुर स्थित मंगलम् रिसॉर्ट में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित अमर कालजयी कृति 'भारत-भारती' के नव संस्करण का भव्य विमोचन समारोह गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस नव संस्करण का संपादन जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने किया है।

विमोचन समारोह की अध्यक्षता स्वयं पूज्य स्वामी आगमानंद जी महाराज ने की। इस ऐतिहासिक अवसर पर शिक्षा, न्याय, अध्यात्म और साहित्य जगत की अनेक गणमान्य हस्तियां एक मंच पर एकत्र हुईं। 'भारत मतलब देश और भारती मतलब सरस्वती' के भाव के साथ इस साहित्यिक अनुष्ठान की सार्थकता रेखांकित की गई।

श्री शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य स्वामी आगमानंद जी महाराज, श्री उत्तर तोताद्रि मठ विभीषणकुंड (अयोध्या) के उत्तराधिकारी भी हैं। 

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) एवं बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के कुलपति प्रो. (डॉ.) विमलेन्दु शेखर झा तथा विधान पार्षद (एमएलसी) व सिंडीकेट सदस्य डॉ. संजीव कुमार सिंह सहित सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके उपरांत प्रख्यात गीतकार राजकुमार ने सुमधुर 'दीप गान' प्रस्तुत कर पूरे सभागार को भावपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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'हम कौन थे, क्या हो गए और क्या होंगे अभी'

स्वामी आगमानंद जी महाराज ने कहा कि आज के दौर में भले ही किताबों के प्रति आम लोगों की रुचि कुछ कम हुई दिखती हो, लेकिन जो लोग निष्ठावान और शिक्षा के प्रति समर्पित हैं, वे आज भी अध्ययन को जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। समाज में आज भी गंभीर रचनाकारों, विचारकों और साहित्यकारों की कोई कमी नहीं है।

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की अमर पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा— "हम कौन थे, क्या हो गए और क्या होंगे अभी, आओ विचारें आज मिलकर ये समस्याएं सभी।" संसार समस्याओं और उतार-चढ़ाव से भरा है, कभी उन्नति तो कभी अवनति। किसी का भी समय सदा एक जैसा नहीं रहता। हर समस्या का स्थायी समाधान गहन विचार और परस्पर संवाद से ही संभव है। हमें यह आत्ममंथन करने की आवश्यकता है कि हम किनके वंशज और संतान हैं।

स्वामी आगमानंद जी ने आगे कहा कि 'भारत-भारती' तीन खंडों में रचित वह अनुपम धरोहर है जो देश के गौरवशाली अतीत, तत्कालीन वर्तमान और भविष्य को गहराई से रेखांकित करती है। यह पुस्तक सनातन संस्कृति का प्रतीक और राष्ट्रभक्ति का भाव जगाने वाली भारत माता की साक्षात पूजा है। इसमें रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता का सार समाहित है, जिसका संदेश हर पीढ़ी के लिए दिशा-निर्देश का कार्य करता है।

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  • भागलपुर के लोदीपुर स्थित मंगलम् रिसॉर्ट में आयोजित हुआ 'भारत-भारती' के नव संस्करण का लोकार्पण 

  • परमहंस स्वामी आगमानन्द जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ गरिमामयी साहित्यिक आयोजन

  • टीएमबीयू व बीएनएमयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) विमलेन्दु शेखर झा ने मंच का उद्घाटन किया

  • एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह रहे भारत भारती पुस्‍तक के लोकार्पणकर्ता

  • मारवाड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार झा मुख्य अतिथि

  • सेवानिवृत्त जिला जज वीरेन्द्र मिश्र विशिष्ट अतिथि के रूप में रहे उपस्थित

कुलपति प्रो. (डॉ.) विमलेन्दु शेखर झा ने राष्ट्रकवि की रचनाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 'भारत-भारती' ने देश के स्वाधीनता आंदोलन में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने का जो ऐतिहासिक कार्य किया था, वह विचार आज की पीढ़ी के लिए भी उतना ही प्रेरणादायी है।

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साहित्य, न्याय और शिक्षाविदों का लगा जमावड़ा

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मारवाड़ी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार झा उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र मिश्र, डॉ. अशोक ठाकुर, अरविंदाक्षण माडम्बथ, डॉ. ज्योतीन्द्र चौधरी (स्वामी जीवनानंद), प्रख्यात गीतकार राजकुमार, डॉ. अर्चना, डॉ. रंजना, मुकेश सिंह, कुंदन बाबा तथा डॉ. मृत्युंजय सिंह 'गंगा' प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी विद्वान मनीषियों, न्यायविदों और शिक्षाविदों ने संयुक्त रूप से मंच से पुस्तक का लोकार्पण किया।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ डॉ. मृत्युंजय सिंह 'गंगा' के स्वागत भाषण से हुआ। पूरे समारोह का कुशल संयोजन चंचल सिंह एवं प्रिया सिंह ने संयुक्त रूप से संभाला। मंच का प्रभावशाली व गरिमामयी संचालन चर्चित उद्घोषिका डॉ. सपना सिंह एवं दिलीप शास्त्री द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रोशन सिंह ने किया। विमोचन समारोह में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।