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    जितने बच्चे खाएंगे मध्याह्न भोजन, उतने के हिसाब से मिलेगा बजट; भागलपुर में 1782 स्कूलों के डेटा पर रहेगी नजर

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 01:26 PM (IST)

    सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना में पारदर्शिता लाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है, अब बजट बच्चों के भोजन करने की वास्तविक संख्या पर आधारित ह ...और पढ़ें

    मध्याह्न भोजन योजना निदेशक का निर्देश: 1 से 7 तारीख तक दर्ज होगा डेटा, 8 से 11 तक API से केंद्र को होगा ट्रांसफर

    मध्याह्न भोजन योजना निदेशक का निर्देश: 1 से 7 तारीख तक दर्ज होगा डेटा, 8 से 11 तक API से केंद्र को होगा ट्रांसफर

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। सरकारी विद्यालयों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना में अब पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। अब विद्यालयों को मिलने वाले मासिक बजट का सीधा आधार बच्चों के भोजन करने की वास्तविक संख्या बनेगी। यानी जिस स्कूल में जितने बच्चे दोपहर का भोजन करेंगे और उनका डेटा पोर्टल पर दर्ज होगा, उसी अनुपात में फंड जारी किया जाएगा।

    इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र ने भागलपुर समेत सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत भागलपुर के सभी 1,782 प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के आंकड़ों की कड़ाई से निगरानी की जाएगी।

    1 से 7 तक दर्ज होगा डेटा, 11 तारीख के बाद लॉक हो जाएगा पोर्टल

    जारी निर्देश के अनुसार, प्रत्येक माह की 1 से 7 तारीख तक प्रखंड साधन सेवी (BRP) अपने-अपने प्रखंड के विद्यालयों का डेटा 'एमडीएम बिहार पोर्टल' पर अनिवार्य रूप से अपलोड करेंगे। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) द्वारा संचालित स्कूलों के आंकड़े भी शामिल रहेंगे।

    इसके बाद 8 से 11 तारीख की दोपहर 12 बजे तक इस डेटा को एपीआई (API) के माध्यम से केंद्र सरकार के 'पीएम पोषण पोर्टल' पर हस्तांतरित किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 11 तारीख की दोपहर 12 बजे के बाद डेटा प्रविष्टि की प्रक्रिया स्वतः बंद हो जाएगी और आंकड़े सीधे भारत सरकार के 'प्रगति पोर्टल' पर शिफ्ट हो जाएंगे।

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    डीपीएम, बीआरपी और प्रधानाध्यापकों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

    पोर्टल पर शत-प्रतिशत सटीक आंकड़ा दर्ज कराने और इस नई व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए राज्य भर के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिला स्तर पर डीपीएम और लेखापाल, प्रखंड स्तर पर बीआरपी तथा विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापकों (HM) को डेटा एंट्री, वेरिफिकेशन और एपीआई ट्रांसफर का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    विभाग ने यह भी हिदायत दी है कि किसी कारणवश डेटा स्वचालित रूप से ट्रांसफर नहीं होने पर बीआरपी अपने लॉगिन से मैनुअल एंट्री करेंगे। किसी भी सूरत में आंकड़े को शून्य (Zero) नहीं छोड़ा जाएगा। इसके अलावा नए स्कूलों को जोड़ने या पुराने बंद पड़े स्कूलों को निष्क्रिय करने का अधिकार केवल जिला कार्यालय के पास होगा।