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भागलपुर में रसोई का बजट बिगड़ा, थाली हुई महंगी, सब्जी 30 से 50 रुपये, टमाटर 40 तो पनीर 400 रुपये Kg

Published: Tue, 26 May 2026 05:15 PM (IST)

भागलपुर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, अनियमित रसोई गैस आपूर्ति और विक्रमशिला पुल क्षति के कारण आवश्यक वस्तुओं के दाम ...और पढ़ें

महंगाई की मार से बिगड़ा रसोई का बजट: सब्जी, दूध और घी के दामों में उछाल, थाली हुई महंगी

महंगाई की मार से बिगड़ा रसोई का बजट: सब्जी, दूध और घी के दामों में उछाल, थाली हुई महंगी

संवाद सूत्र, अकबरनगर (भागलपुर) पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों, रसोई गैस की अनियमित आपूर्ति और विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन बाधित होने का सीधा असर अब स्थानीय बाजारों पर साफ दिखने लगा है। अकबरनगर बाजार में खाद्य सामग्री के दाम तेजी से बढ़ गए हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।

सब्जियों के दामों में अचानक उछाल

सबसे अधिक असर हरी सब्जियों पर पड़ा है। आलू, प्याज, टमाटर, भिंडी, परवल, बैंगन सहित अन्य सब्जियों के दामों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। स्थानीय सब्जी विक्रेताओं के अनुसार डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो गई है। वहीं विक्रमशिला पुल क्षति घटना के बाद बड़े वाहनों को लंबा मार्ग तय करना पड़ रहा है, जिससे समय और भाड़ा दोनों बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर थोक से लेकर खुदरा कीमतों तक दिखाई दे रहा है।

पहले 500 में चलती थी रसोई, अब दो दिन में खत्म बजट

गृहिणियों का कहना है कि पहले 500 रुपये में पांच दिनों तक घर की सब्जियां आसानी से आ जाती थीं, लेकिन अब वही राशि मुश्किल से दो दिनों तक ही चल पा रही है। बाजार में रोज बदलते दामों ने घर का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। सब्जी विक्रेता राजेश कुमार ने बताया कि पहले भागलपुर मंडी से कम खर्च में सब्जियां पहुंच जाती थीं, लेकिन अब परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गई है।

दूध, पनीर और घी भी हुए महंगे

महंगाई का असर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं है। दूध, पनीर, दही और घी जैसे डेयरी उत्पादों के दामों में भी तेजी आई है। दूध विक्रेताओं के अनुसार पशु चारा, परिवहन और ईंधन की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो गया है।

पहले जहां पनीर 320 से 340 रुपये प्रति किलो मिलता था, अब वही 400 रुपये के आसपास पहुंच गया है। घी और मिठाई की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

गैस और ईंधन संकट से बढ़ी परेशानी

रसोई गैस की अनियमित आपूर्ति ने आम उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ा दी है। कई परिवारों का कहना है कि समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है, जिससे हर वस्तु की कीमत ऊपर चली गई है।

दिहाड़ी मजदूर और मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर

महंगाई की सबसे बड़ी मार दिहाड़ी मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रही है। आमदनी में कोई खास वृद्धि नहीं होने के बावजूद रोजमर्रा की जरूरतों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अब घर चलाना पहले की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल हो गया है। बच्चों की जरूरतें और रसोई का खर्च दोनों संभालना चुनौती बन गया है।

उपभोक्ताओं की पीड़ा

ललिता प्रभाकर ने बताया कि पहले 500 रुपये में पांच दिन का सामान आ जाता था, लेकिन अब दो दिन में ही बजट खत्म हो जाता है।स्वीटी गुप्ता के अनुसार दूध, तेल और गैस के दाम बढ़ने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। मीरा देवी ने कहा कि पहले रोज अलग-अलग सब्जियां बनती थीं, लेकिन अब महंगाई के कारण सीमित सामान ही खरीदना पड़ रहा है। कंचन सिंह ने बताया कि पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद से बाजार में सामान महंगा आने लगा है और गैस सिलेंडर भी समय पर नहीं मिल रहा है।

सब्जियों के वर्तमान बाजार भाव

परवल: 30 रुपये प्रति किलो, करैला: 30 रुपये, कुंदरी: 30 रुपये, बंदा गोभी: 35 रुपये, फूल गोभी: 40 से 50 रुपये प्रति फूल, टमाटर: 40 रुपये प्रति किलो, कद्दू: 15 से 20 रुपये प्रति पीस, झिंगली: 30 रुपये प्रति किलो, परोल: 30 रुपये प्रति किलो।

आम उपभोक्ता परेशान

लगातार बढ़ती महंगाई, परिवहन संकट और गैस की अनियमित आपूर्ति ने अकबरनगर के आम लोगों की रसोई पर सीधा असर डाला है। सब्जियों से लेकर डेयरी उत्पादों तक हर चीज महंगी होने से थाली अब पहले से अधिक महंगी हो गई है, जिससे आम उपभोक्ता परेशान हैं।