विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चारों तरफ सैलाब और 7 घंटे अंधेरा! भागलपुर NH-80 पर बहा गंगा का पानी; बाढ़ में लाइनमैनों ने पेड़ काटकर बहाल की बिजली

Published: Sun, 06 Sep 2026 12:54 PM (IST)

Bhagalpur Ganga Flood Power Crisis: अकबरनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गंगा का जलस्तर बढ़ने से भीषण बाढ़ आ ...और पढ़ें

Bhagalpur Ganga Flood Power Crisis: अकबरनगर में NH-80 पर दो फीट बहा बाढ़ का पानी, भुवालपुर फीडर बंद; कोलगामा में 11 KV तार पर पेड़ गिरने से 7 घंटे गुल रही बत्ती

Bhagalpur Ganga Flood Power Crisis: अकबरनगर में NH-80 पर दो फीट बहा बाढ़ का पानी, भुवालपुर फीडर बंद; कोलगामा में 11 KV तार पर पेड़ गिरने से 7 घंटे गुल रही बत्ती

HighLights

  1. अकबरनगर में गंगा के लाल निशान पार करने से भीषण बाढ़।

  2. NH-80 पर दो फीट पानी, कई गांव हुए टापू।

  3. कोलगामा में पेड़ गिरने से 7 घंटे बिजली बाधित।

संवाद सूत्र, अकबरनगर (भागलपुर)। Bhagalpur Ganga Flood Power Crisis: गंगा के लाल निशान पार करने के बाद अकबरनगर और इसके आसपास के ग्रामीण व दियारा इलाकों में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। शनिवार की रात से रविवार के बीच पानी का फैलाव इतनी तेजी से हुआ कि देखते ही देखते दर्जनों गांव जलमग्न हो गए। इस गंभीर जलप्लावन के बीच इलाके में बिजली संकट ने बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतों को कई गुना बढ़ा दिया।

एक ओर जहां भुवालपुर फीडर में बाढ़ का पानी घुसने से सुरक्षा के तहत आपूर्ति बंद करनी पड़ी, वहीं दूसरी ओर कोलगामा में हाईटेंशन तार पर विशाल पेड़ की टहनी टूटकर गिर जाने से अकबरनगर और सुल्तानगंज से जुड़े इलाकों में करीब सात घंटे तक ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही।

Bhagalpur Floods Akbarnagar Submerged NH 80 Cut 7 Hr Blackout (1)

बाढ़ का सबसे गंभीर असर भागलपुर-अकबरनगर मुख्य मार्ग (एनएच-80) पर पड़ा है। भवनाथपुर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो अलग-अलग स्थानों पर करीब दो फीट की ऊंचाई में पानी की तेज धार बहने लगी है, जिससे भारी व हल्के वाहनों का आवागमन बेहद जोखिम भरा हो गया है।

इंग्लिश चिचरौन, श्रीरामपुर, महेशी, पैन, मकंदपुर और खरैहिया सहित कई गांव चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू बन चुके हैं। ग्रामीण संपर्क सड़कें जगह-जगह कटकर गहरी खाइयों में तब्दील हो गई हैं, जिससे दियारा क्षेत्र का प्रखंड व जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह भंग हो चुका है।

कोलगामा में HT तार पर गिरी टहनी, बाढ़ के पानी के बीच 7 घंटे बाद बहाल हुई बिजली

सैलाब के बीच बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने से ग्रामीणों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। शुक्रवार को कोलगामा गांव के पास मुख्य 11 केवी (हाईटेंशन) विद्युत लाइन पर एक विशाल पेड़ की भारी टहनी टूटकर गिर गई। कनीय अभियंता (जेई) मंजय कुमार ने बताया कि जिस स्थान पर लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी, वहां पहले से ही बाढ़ का पानी भरा हुआ था।

गंदे पानी और दलदल के बीच करंट के जोखिम को देखते हुए लाइनमैनों को मरम्मत कार्य करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। विद्युत कर्मियों ने पानी में उतरकर पहले सावधानीपूर्वक पेड़ की डाल को काटकर हटाया और फिर तारों को दुरुस्त किया। करीब सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर करीब दो बजे आपूर्ति बहाल की जा सकी।

Bhagalpur Floods Akbarnagar Submerged NH 80 Cut 7 Hr Blackout (2)

वहीं, भुवालपुर विद्युत शक्ति उपकेंद्र (पीएसएस) परिसर में बाढ़ का पानी घुस जाने के कारण एहतियातन दक्षिणी इलाके की लाइन बंद रखी गई है, जिससे हजारों की आबादी अंधेरे में रात काटने को विवश है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शाहाबाद से लाइन जोड़कर आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

आधा दर्जन स्कूलों में 5 फीट पानी, निजी नावों से पहुंच रहा चारा

अकबरनगर क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक प्राथमिक, मध्य और गैर-सरकारी स्कूल परिसर सैलाब में डूब गए हैं। कई विद्यालयों के कमरों में चार से पांच फीट तक पानी जमा हो जाने के कारण पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है और स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

उधर, पूर्वी टोला स्थित गंगा पार के कशमाबाद गांव के लोगों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाने के कारण ग्रामीण निजी नावों के सहारे जान जोखिम में डालकर मवेशियों का सूखा चारा और रोजमर्रा का जरूरी सामान ढो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त सरकारी नावों की व्यवस्था न होने से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

Bhagalpur Floods Akbarnagar Submerged NH 80 Cut 7 Hr Blackout (3)

रेलवे स्टेशन व सड़क किनारे बना आशियाना, राहत की दरकार

घरों के भीतर कमर तक पानी घुस जाने के बाद बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार मवेशियों को लेकर भागलपुर-जमालपुर रेलखंड स्थित अकबरनगर रेलवे स्टेशन और अकबरनगर-शाहकुंड मुख्य मार्ग के ऊंचे किनारों पर शरण लिए हुए हैं।

Bhagalpur Floods Akbarnagar Submerged NH 80 Cut 7 Hr Blackout (4)

लोग खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक शीट तानकर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ितों के सामने न सिर्फ भोजन, बल्कि शुद्ध पेयजल और शौचालय का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से अविलंब पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) शुरू करने की गुहार लगाई है।