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    पेट्रोल में 20% इथेनाल मिश्रण से बदला ऊर्जा का गणित; पेट्रोल पंपों पर सहज इस्तेमाल, संवर रही भारत की अर्थव्यवस्था

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 07:59 AM (IST)

    भागलपुर में E-20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अब आम हो गया है, जो देश की ऊर्जा नीति में बड़े बदलाव का प्रतीक है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, कार्बन उत ...और पढ़ें

    भागलपुर के पेट्रोल पंपों पर बिना झिझक E-20 पेट्रोल भरवा रहे लोग; खेत से आ रही ऊर्जा से घट रही कच्चे तेल पर निर्भरता

    भागलपुर के पेट्रोल पंपों पर बिना झिझक E-20 पेट्रोल भरवा रहे लोग; खेत से आ रही ऊर्जा से घट रही कच्चे तेल पर निर्भरता

    HighLights

    1. E-20 पेट्रोल भागलपुर में सहज, ऊर्जा नीति का बदलाव।

    2. 1 लाख करोड़ से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत हुई।

    3. इथेनॉल मिश्रण से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर की सड़कों पर सरपट दौड़ते वाहनों और पेट्रोल पंपों पर लगी कतारों के बीच देश की ऊर्जा नीति का एक बड़ा और दूरगामी बदलाव अब आम जीवन का सहज हिस्सा बन चुका है। भागलपुर के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालक बेझिझक पेट्रोल भरवा रहे हैं। अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए इथेनाल मिश्रित पेट्रोल अब कोई नई या अजीब बात नहीं रह गई है।

    जिस जैव ईंधन (Biofuel) को कभी वैकल्पिक प्रयोग के तौर पर देखा जाता था, वह अब देश के नियमित ईंधन तंत्र में पूरी तरह समा चुका है। भागलपुर के पेट्रोल पंपों की सामान्य चहल-पहल इसी बड़े बदलाव की स्थानीय तस्वीर पेश करती है। वाहन वही हैं, ईंधन भी वही दिखता है, लेकिन उसमें शामिल ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा अब विदेशी तेल कुओं के बजाय देश के खेतों और किसानों के पसीने से आ रहा है।

    क्या है E-20 पेट्रोल और क्यों सुरक्षित है यह ईंधन?

    ई-20 (E-20) का सामान्य अर्थ है कि पेट्रोल में मात्रा के आधार पर 20 प्रतिशत इथेनाल मिलाया गया है। यह ईंधन निर्धारित मानकों और वाहन निर्माताओं की अनुशंसाओं के अनुरूप पूरी तरह सुरक्षित है। इथेनाल केवल ईंधन का विकल्प मात्र नहीं है, इसका उत्पादन गन्ने के उप-उत्पादों और अनाज जैसे घरेलू कृषि उत्पादों (Feedstock) से किया जाता है।

    इससे कृषि क्षेत्र के लिए एक नया और बड़ा बाजार तैयार हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इथेनाल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के कारण देश के चीनी उद्योग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को हजारों करोड़ रुपये का सीधा भुगतान हुआ है।

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    1.14% से 20% तक का रिकॉर्ड सफर

    भारत में इथेनाल मिश्रण का सफर देश की मजबूत होती ऊर्जा नीति का गवाह है। वर्ष 2014-15 में जहां पेट्रोल में इथेनाल का मिश्रण महज 1.14 प्रतिशत था, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 12 प्रतिशत, 2023-24 में 14.6 प्रतिशत और 2024-25 में 19.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत औसत मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है।

    ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की बचत

    ईबीपी कार्यक्रम के कारण वर्ष 2014-15 से जुलाई 2025 तक देश को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इस अवधि के दौरान लगभग 245 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की जगह इथेनाल का इस्तेमाल किया गया, जिससे कार्बन उत्सर्जन में करीब 736 लाख मीट्रिक टन की भारी कमी दर्ज की गई है।

    "भागलपुर मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान क्षेत्र है, इसलिए जैव ईंधन की इस अवधारणा को स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था से सीधे जोड़कर देखा जाना चाहिए। घरेलू कृषि उत्पादों और उससे जुड़े औद्योगिक उप-उत्पादों से बनने वाला इथेनाल एक तरफ देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, तो दूसरी तरफ हमारे किसानों के लिए अतिरिक्त आय और नया बाजार तैयार कर रहा है।"

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    — डॉ. राजेश, पीआरओ, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU, सबौर)

    "भागलपुर में इथेनाल मिश्रित पेट्रोल का बदलाव अब रोजमर्रा का हिस्सा बन गया है। पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ता नियमित रूप से बिना किसी संकोच के ई-20 ईंधन भरवा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसका सहज इस्तेमाल इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जैव ईंधन अब केवल कागजी नीतियों तक सीमित न रहकर आम जनता के दैनिक परिवहन का मुख्य साधन बन चुका है।"

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    सुमन कुमार सिंह, प्रोपराइटर, हरिओम फ्यूल सेंटर (जीरोमाइल, भागलपुर)