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भागलपुर में ₹98 लाख के शिक्षक घोटाले में बड़ा मोड़; वादी बने DPO स्थापना से पूछताछ, ऑपरेटर समेत 6 पर केस दर्ज

Published: Fri, 09 Oct 2026 12:32 PM (IST)

Bhagalpur Education Scam: भागलपुर के ₹98 लाख के शिक्षा घोटाले में नया मोड़ आया है, जहाँ फर्जी शिक्षिका 'तनुश्री' की ...और पढ़ें

HighLights

  1. ₹98 लाख के शिक्षा घोटाले में डीपीओ और ऑपरेटर से पूछताछ।

  2. फर्जी शिक्षिका 'तनुश्री' आईडी बनाकर सरकारी खजाने से गबन।

  3. एचआरएमएस पोर्टल पर एचआरए में भारी हेरफेर का खुलासा।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Education Scam: जिला शिक्षा विभाग में 'तनुश्री' नाम से फर्जी विशिष्ट शिक्षिका की आईडी बनाकर सरकारी खजाने से 98 लाख रुपये के गबन के बहुचर्चित मामले में बेहद चौंकाने वाला और नाटकीय मोड़ सामने आया है। इस मामले में डीपीओ (स्थापना) शशि चंदन चौधरी ने जोगसर थाने में खुद वादी बनकर संविदा ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी काजल और उच्‍च वर्गीय ल‍िप‍िक श‍िश‍िर झा शिशिर झा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अब 

सूत्रों के अनुसार, पुलिस की विशेष टीम ने देर रात बांका जिले के शंभूगंज से संविदा ऑपरेटर अविनाश राज और भागलपुर से डीपीओ शशि चंदन चौधरी को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सक्षम पुलिस पदाधिकारियों ने फिलहाल गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और सिटी डीएसपी हेमंत सिंह इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक बयान देने से बचते नजर आए।

मेकर-चेकर व्यवस्था में बिना डीपीओ की मंजूरी संभव नहीं था खेल

विभागीय सूत्रों और पुलिस जांच के तकनीकी विश्लेषण में यह बात शीशे की तरह साफ हो गई है कि शिक्षा विभाग के एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर वेतन भुगतान प्रणाली का संचालन बेहद सुरक्षित होता है। इसमें संचिका प्रभारी (मेकर) द्वारा डेटा फीड करने के बाद अंतिम 'चेकर' और 'डिजिटल अप्रूवल' का अधिकार सिर्फ और सिर्फ डीपीओ स्थापना के पास सुरक्षित रहता है। बिना डीपीओ की आईडी और डिजिटल सिग्नेचर के न तो कोई नई आईडी बन सकती है और न ही भत्तों में संशोधन हो सकता है।

जांच में खुलासा हुआ कि यह खेल अप्रैल 2025 से ही चल रहा था। 'तनुश्री' नाम से बनाई गई फर्जी आईडी में जाली पैन कार्ड, फर्जी पीआरएएन (PRAN) और एक जनधन खाते को जोड़ा गया था। शुरुआत में सामान्य वेतन (लगभग सात लाख) की निकासी की गई, लेकिन इसके बाद पोर्टल के एडिट विकल्प में जाकर भारी हेरफेर किया गया।

20% की जगह HRA कर दिया 2000%

बिहार सरकार के नियमानुसार पटना जैसे 'वाई' श्रेणी के शहर में भी अधिकतम मकान किराया भत्ता (HRA) 20 प्रतिशत ही देय है, लेकिन इस फर्जी आईडी में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एचआरए को मूल वेतन का करीब 2000 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया। इस बेखौफ तरीके से एक ही आईडी के जरिए 98 लाख रुपये के भारी-भरकम ट्रांजेक्शन को अंजाम दे दिया गया।

फरीदाबाद के रास्ते घूमी रकम

वित्तीय ट्रेल से पता चला है कि सरकारी खाते से निकाली गई राशि पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में भेजी गई (जहां अविनाश के रिश्तेदार रहते हैं), और फिर वहां से भागलपुर वापस मंगाई गई। यूपीआई के जरिए सबसे अधिक लेनदेन ऑपरेटर अविनाश की पत्नी काजल और एक अन्य युवक गौतम कुमार के खातों में हुए। इस काली कमाई से एक स्थानीय ऑटोमोबाइल एजेंसी से चौपहिया गाड़ी खरीदी गई और लगातार एटीएम से भारी कैश निकाला गया।

हटाने के बाद भी खुला रहा लॉगिन

इस घोटाले में डीपीओ कार्यालय की मिलीभगत का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि विभाग ने कथित तौर पर जून 2026 में अविनाश को कार्य से हटा दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसी सिस्टम और आईडी से लाखों का लेनदेन अनवरत जारी रहा। सवाल उठ रहा है कि सेवा समाप्त होने के बाद भी ऑपरेटर के पास लॉगिन क्रेडेंशियल कैसे मौजूद रहे और डीपीओ ने इसे तत्काल ब्लॉक क्यों नहीं कराया?

दफ्तर से अहम फाइलें गायब

एचआरएमएस पटना की टीम द्वारा गबन पकड़े जाने के बाद विभाग ने आनन-फानन में बैंक खाते के 46 लाख रुपये होल्ड कराए और जोगसर थाने में केस दर्ज कराकर खुद को पाक-साफ साबित करने का प्रयास किया। लेकिन जब गुरुवार को जोगसर पुलिस साक्ष्य जुटाने जिला शिक्षा कार्यालय पहुंची, तो वहां से संबंधित कई महत्वपूर्ण संचिकाएं (फाइलें) गायब मिलीं।

पुलिस अब डीपीओ के कंप्यूटर का आईपी एड्रेस, लॉगिन टाइमिंग, अप्रूवल लॉग और डिजिटल सिग्नेचर का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही है। महकमे में अब यह भी चर्चा जोरों पर है कि क्या पोर्टल पर 'तनुश्री' जैसी अन्य फर्जी आईडी भी बनाकर सरकारी खजाने को लूटा गया है? 

"भागलपुर जिला शिक्षा विभाग के उच्च वर्गीय लिपिक शिशिर झा को निलंबित कर दिया गया है।" 

यह भी पढ़ें- फर्जी शिक्षिका के नाम से 1 करोड़ का गबन, HRMS पटना की जांच में खुला खेल; भागलपुर के बर्खास्त ऑपरेटर पर केस की तैयारी

98 लाख के व‍ित्‍तीय अन‍ियम‍ितता का मामला सामने में आया है। अभी कुछ लोगों पर प्राथम‍िकी दर्ज की गई है। डीपीओ स्‍थापना से पूछताछ की जा रही है। इनके भूम‍िका पूरी तरह साफ होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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हेमंत स‍िंंह, सि‍टी एएसपी, भागलपुर

जिला शिक्षा विभाग में ₹98 लाख के गबन मामले में आदमपुर थाने में संविदा आधारित ऑपरेटर अविनाश राज, उसकी पत्नी काजल और राशि प्राप्त करने वाली तनुजा देवी समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।"

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सुभाष चंद्र गुप्‍ता, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक