भागलपुर में एरी सिल्क उत्पादन की नई पहल, चार दशक बाद लौट रही अरंडी की खेती
भागलपुर में चार दशक बाद एरी सिल्क उत्पादन फिर से शुरू हो रहा है। अरंडी और कसेरू की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे 1,400 किसानों को लाभ मिलेगा। ब ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
भागलपुर में चार दशक बाद एरी सिल्क उत्पादन की वापसी।
अरंडी और कसेरू की खेती से 1,400 किसानों को लाभ।
हैंडलूम उद्योग को मिलेगा सस्ता कच्चा माल, आय में वृद्धि।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर में चार दशक बाद एरी सिल्क उत्पादन की नई शुरुआत होने जा रही है। जिले में अरंडी (अंडी) की खेती और कसेरू पौधरोपण को बढ़ावा देने की ठोस पहल की गई है। इस योजना से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि भागलपुर के हैंडलूम उद्योग को भी नया जीवन मिलेगा।
हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय, बिहार सरकार की ओर से 1,400 किसानों को इस योजना में शामिल किया गया है। ये किसान अरंडी और कसेरू की खेती के साथ-साथ एरी सिल्क के लिए कीट पालन कर कोकून उत्पादन करेंगे। बंगाल और असम में एरी का अत्यधिक उत्पादन होता है, अब भागलपुर को भी एरी सिल्क का नया केंद्र बनाने की तैयारी है।
एरी रेशम योजना के तहत किसानों को आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है। एक यूनिट स्थापित करने पर सामान्य वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत और एससी/एसटी वर्ग के किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। अनुदान राशि तीन किस्तों में दी जाएगी। हाल ही में 400 किसानों को पहली किस्त जारी की गई है। इस राशि से किसान कीट पालन के लिए कमरे का निर्माण करेंगे, जिसे मार्च तक पूरा करना होगा। योजना के तहत कुल 1,400 किसानों को लाभ मिलेगा।
एरी रेशम उत्पादन कसेरू और अरंडी की पत्तियों पर पलने वाले कीटों से होता है। भागलपुर की बलुई दोमट मिट्टी अरंडी की खेती के लिए उपयुक्त है। बिना फूल वाली लाल अरंडी किस्म (एनबीआर-1) एरी रेशम के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। एक एकड़ क्षेत्र से साल भर में करीब 4,800 किलोग्राम पत्तियों की कटाई संभव है।
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चार दशक पहले लुप्त हुई अरंडी की खेती को पुनर्जीवित किया जा रहा है। योजना के तहत बंगाल से कसेरू पौधे लाए जाएंगे और किसानों को बीज, खाद व तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। स्थानीय स्तर पर एरी सिल्क उत्पादन शुरू होने से बुनकरों को अब धागा अन्य राज्यों से मंगाना नहीं पड़ेगा, जिससे हैंडलूम उद्योग को सस्ता और सुलभ कच्चा माल मिलेगा। वर्तमान में किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की संभावना है और आने वाले वर्षों में भागलपुर एरी सिल्क का बड़ा केंद्र बन सकता है।