रिश्तों का ‘ब्रेकअप ट्रेंड’, भागलपुर में 37 पत्नियां प्रेमी संग फरार, चिट्ठी छोड़कर लिखा- मेरी मंजिल कुछ और है
भागलपुर में पत्नियों द्वारा प्रेमियों के साथ घर छोड़कर जाने के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, 2025-2026 में ऐसे 37 मामले दर्ज हुए हैं। मोबाइल, पुरा ...और पढ़ें

भागलपुर में रिश्तों का टूटता ताना-बाना: 37 शादीशुदा महिलाएं घर छोड़कर प्रेमी संग फरार, पुलिस-कोर्ट के बीच उलझे मामले
HighLights
2025-26 में भागलपुर में 37 पत्नियां प्रेमी संग फरार।
मोबाइल चैटिंग, पुराने संबंध, विवाद प्रमुख कारण।
अधिकांश महिलाएं बरामद पर पति संग लौटने से इनकार।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले में पारिवारिक रिश्तों के टूटने की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है। मामूली विवादों के बाद पत्नियों के घर छोड़कर प्रेमी के साथ फरार होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025 से अप्रैल 2026 तक जिले में कुल 37 ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें शादीशुदा महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को छोड़कर दूसरे के साथ रहने चली गईं।
इन मामलों में इशाकचक, बरारी, जोगसर, तातारपुर, घोघा, नाथनगर समेत कई थानों में पति द्वारा केस दर्ज कर पत्नियों की बरामदगी की गुहार लगाई गई है। कई घटनाओं में महिलाओं ने घर छोड़ते समय भावुक पत्र भी छोड़े हैं- “मेरी मंजिल कुछ और है”, “मुझे मत ढूंढना”, “टाटा-बाय बाय” जैसे संदेश छोड़कर वे घर से चली गईं।थानों में दर्ज 37 मामले, कई चौंकाने वाले पैटर्न
पुलिस सूत्रों के अनुसार 2025 से 2026 के बीच दर्ज मामलों का थानावार आंकड़ा इस प्रकार है—इशाकचक में 9, बरारी में 7, जोगसर में 6, तातारपुर में 5, घोघा में 4, नाथनगर में 3 तथा अन्य थानों में मिलाकर 3 मामले दर्ज हुए हैं।
इन 37 मामलों में लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं की शादी को 1 से 5 वर्ष ही हुए थे। अधिकांश मामलों में मोबाइल चैटिंग, पुराने प्रेम संबंध या दहेज को लेकर हुए विवाद प्रमुख कारण सामने आए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि करीब 70 प्रतिशत मामलों में महिलाएं पहले से ही किसी न किसी संपर्क में थीं, जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गया।
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केस स्टडी 1: इशाकचक का मामला
इशाकचक थाना क्षेत्र के सुरेश मंडल ने 12 मार्च 2026 को शिकायत दर्ज कराई कि उनकी पत्नी काजल शादी के तीन साल बाद अक्सर देर रात मोबाइल पर किसी से बात करती थी। विरोध करने पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और अगले ही दिन काजल घर छोड़कर चली गई।
जाते समय उसने एक पत्र छोड़ा- “सॉरी, मेरी मंजिल कुछ और है, मुझे मत ढूंढना।” जांच में पता चला कि वह मुंगेर के अपने पुराने प्रेमी विकास के साथ दिल्ली चली गई है, जहां दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं।
पति ने अपहरण का मामला दर्ज कराया, लेकिन अदालत में काजल ने खुद को बालिग बताते हुए स्वेच्छा से जाने की बात कही, जिससे मामला कानूनी रूप से कमजोर हो गया।
केस स्टडी 2: बरारी थाना क्षेत्र
बरारी थाना क्षेत्र में ऑटो चालक रंजीत साह की पत्नी रीना देवी अपने दो बच्चों को नानी के घर छोड़कर प्रेमी के साथ फरार हो गई। जाते-जाते उसने पति को व्हाट्सएप पर संदेश भेजा- “टाटा, अब तुम्हारे साथ नहीं रह सकती।”
रंजीत का आरोप है कि पत्नी का पड़ोस के युवक से पिछले छह महीने से संबंध था। घर में लगातार विवाद के बाद स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल लोकेशन के आधार पर रीना को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से बरामद किया, लेकिन उसने पति के साथ लौटने से साफ इनकार कर दिया। मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है।
मोबाइल और सोशल मीडिया बन रहे कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों में सोशल मीडिया और मोबाइल की भूमिका अहम है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर पुराने संबंधों की पुनः शुरुआत कई बार नए विवादों को जन्म दे रही है।
इसके अलावा घरेलू तनाव, आर्थिक तंगी, आपसी समझ की कमी और वैवाहिक जीवन में असंतोष भी प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों की राय
मनोवैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार तिवारी के अनुसार आज के समय में रिश्तों में स्थिरता तेजी से कमजोर हो रही है। उनका कहना है कि डिजिटल युग में पुराने संबंध फिर से सक्रिय हो जाते हैं, जिससे वैवाहिक जीवन प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में महिलाएं बालिग होने के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयान में अपनी मर्जी से जाने की बात कहती हैं, जिससे पुलिस भी उन्हें रोक नहीं सकती।
डॉ. तिवारी के अनुसार जब बरामदगी के बाद भी महिला पति के साथ जाने से इनकार कर देती है तो परिवार पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच जाता है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है।
पुलिस की स्थिति और चुनौतियां
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अधिकांश मामलों में महिलाएं बरामद तो हो जाती हैं, लेकिन केवल चार मामलों में ही वे वापस अपने पति के साथ रहने को तैयार हुई हैं। बाकी मामलों में महिलाओं ने कोर्ट से सुरक्षा लेकर अपने प्रेमी के साथ रहने का निर्णय लिया है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया सीमित हो जाती है और परिवारिक विवाद सामाजिक समस्या का रूप ले लेता है।
टूटते रिश्तों पर बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि “सात फेरों” का विश्वास धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। मामूली विवादों में घर छोड़ देना और नए संबंधों को प्राथमिकता देना परिवार संस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
काउंसलिंग और जागरूकता की जरूरत
समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों ने काउंसलिंग सेंटर और हेल्पलाइन सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि संवाद और परामर्श के माध्यम से कई रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है।
सामाजिक और मानसिक बदलाव
भागलपुर में सामने आ रहे ये मामले केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी संकेत हैं। बदलते समय में रिश्तों की नींव को मजबूत करने के लिए संवाद, समझ और परामर्श की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।