बिहार में मुखिया जी के 'रील्स राज' में विकास बेदम, वार्ड पार्षद लाइक्स-शेयर में व्यस्त
अकबरनगर पंचायत में विकास कार्य ठप पड़े हैं क्योंकि मुखिया और वार्ड पार्षद सोशल मीडिया रील्स बनाने में अत्यधिक व्यस्त ...और पढ़ें

बिहार में मुखिया जी के 'रील्स राज' में विकास बेदम, वार्ड पार्षद लाइक्स-शेयर में व्यस्त (AI Generated Image)

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संवाद सूत्र, अकबरनगर। जहां एक ओर सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए योजनाओं की झड़ी लगा रही है, वहीं अकबरनगर थाना क्षेत्र के इंग्लिश चिचरौंन पंचायत में विकास मानो ‘रील’ बनकर ही रह गया है। यहां की मुखिया जी इन दिनों सोशल मीडिया की स्टार बनने में इतनी व्यस्त हैं कि पंचायत के मुद्दे कैमरे के फ्रेम से बाहर हो गए हैं।
बताया जाता है कि मुखिया जी रोजाना दर्जनों रील्स पोस्ट कर रही हैं, वो भी हिंदी के सदाबहार गानों पर पूरे भाव-भंगिमा के साथ। गांव की गलियों में भले कीचड़ और जलजमाव हो, लेकिन उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर ‘स्मूद ट्रांजिशन’ और ‘फिल्टर इफेक्ट’ की कोई कमी नहीं है।
इधर, पंचायत के लोग नल-जल योजना की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं, नालियां जाम हैं और जलजमाव से हाल बेहाल है। लेकिन इन समस्याओं का समाधान शायद किसी अगली रील की स्क्रिप्ट में ही मिलेगा।
नगर पंचायत में भी विकास योजनाओं से दूर पार्षद:
मामला यहीं नहीं रुकता। नगर पंचायत अकबरनगर की एक चर्चित वार्ड पार्षद भी इस ‘रील्स क्रांति’ में पीछे नहीं हैं। एक पार्षद अपने पति के साथ रोमांटिक गानों पर रील बनाकर लाइक और व्यूज बटोरने में जुटी हैं।
स्थानीय लोग मजाकिया लहजे में कहते हैं कि अब विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट नहीं, बल्कि ‘रील्स की रीच’ से जनप्रतिनिधियों का आकलन होगा, जबकि पार्षद प्रतिनिधि भी फोटो खिंचाने में आगे रहते है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को अब समस्याओं से ज्यादा ‘कैमरा एंगल’ की चिंता है।
विकास कार्यों की फाइलें धूल खा रही हैं, जबकि मोबाइल का कैमरा चमक रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है - क्या पंचायत का विकास भी अब ‘वायरल’ होने का इंतजार करेगा, या फिर हकीकत में भी कुछ बदलेगा?
