खेत-खलिहानों से उभर रहे नए सपने, वैभव सूर्यवंशी की राह पर चल पड़े गांव के बच्चे
आईपीएल क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की सफलता से प्रेरित होकर, बेगूसराय के मंसूरचक प्रखंड के ग्रामीण बच्चे अब खेतों और खाली मैदानों में क्रिकेट खेल रहे हैं। ...और पढ़ें

वैभव सूर्यवंशी की राह पर चल पड़े गांव के बच्चे
HighLights
वैभव सूर्यवंशी की सफलता से ग्रामीण बच्चे प्रेरित।
खेत-खलिहानों में क्रिकेट खेलते दिख रहे बच्चे।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ी।
रितेश कुमार झा, मंसूरचक (बेगूसराय)। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के युवा क्रिकेटर बिहार के समस्तीपुर जिले के वैभव सूर्यवंशी की सफलता का असर अब मंसूरचक प्रखंड सहित आसपास के गांवों में भी साफ दिखाई देने लगा है। कम उम्र में क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी आज ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
उनकी शानदार बल्लेबाजी और उपलब्धियों से प्रभावित होकर बच्चे अब खेत-खलिहानों, खाली मैदानों और गांव की खुली जगहों में क्रिकेट की पिच तैयार कर खेलते नजर आ रहे हैं।
सुबह और शाम मैदान में पहुंच रहे बच्चे
मंसूरचक प्रखंड के साठा, हवासपुर, गोसपुर, सोहिलवाड़ा, समसा, बहरामपुर, आगापुर, नैपुर सहित कई गांवों में सुबह और शाम बच्चों की टोली बल्ला और गेंद लेकर मैदानों की ओर निकल पड़ती है। कहीं खेत के किनारे मिट्टी समतल कर अस्थायी पिच बनाई गई है तो कहीं ईंट पर ईंट रख विकेट बनाकर मैच खेले जा रहे हैं।
फसल कटने के बाद खाली पड़ी खेत भी अब बच्चों के लिए क्रिकेट मैदान बन चुके हैं। गांवों में गूंजती बल्ले और गेंद की आवाज क्रिकेट के प्रति बढ़ते जुनून की कहानी बयां कर रही है।
वैभव सूर्यवंशी की होती है चर्चा
बच्चों और किशोरों के बीच वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी, संघर्ष और सफलता की खूब चर्चा हो रही है। क्रिकेट खेल रहे किशोरों का कहना है कि वैभव ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रतिभा और मेहनत हो तो गांव या छोटे शहर का कोई भी बच्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है।
यही कारण है कि अब अधिक से अधिक बच्चे क्रिकेट की ओर आकर्षित हो रहे हैं और जो संसाधन उपलब्ध है उसी में खेल रहे हैं। कई बच्चे खुद को भविष्य का वैभव सूर्यवंशी मानते हुए बड़े सपने देख रहे हैं। वे स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ खेल को भी गंभीरता से ले रहे हैं।
खबरें और भी
बच्चों का मानना है कि वैभव की तरह उन्हें भी एक दिन बड़े मंच पर खेलने का मौका मिल सकता है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बच्चों के लिए वैभव की उपलब्धि उम्मीद और आत्मविश्वास की नई किरण बनकर उभरी है।
गांवों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो केवल बेहतर खेल सुविधाओं, प्रशिक्षकों और उचित मार्गदर्शन की। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदानों का विकास किया जाए और बच्चों को प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो यहां से भी कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
वैभव की सफलता ने मंसूरचक ही नहीं, पूरे क्षेत्र के बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है। खेत-खलिहानों में सजती क्रिकेट की पिचें और खेल के प्रति बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि क्रिकेट अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बनता जा रहा है।