पिस्तौल 'खोंसने' के आरोप का सच क्या? वायरल वीडियो के बाद बेगूसराय पहुंचे DIG, गांव में की जांच
बेगूसराय में टॉप-10 अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पर पिस्तौल प्लांट करने का आरोप लगा है। वायरल वीडियो के बाद डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा ने बरियार ...और पढ़ें

ग्रामीणों से जानकारी लेते डीआईजी।
HighLights
सोनू-मोनू सिंह की गिरफ्तारी, टॉप-10 अपराधियों में शामिल
वायरल वीडियो में पुलिस पर पिस्तौल प्लांट का आरोप
डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा ने बरियारपुर गांव में की जांच
संवाद सहयोगी, बलिया (बेगूसराय)। बरियारपुर गांव से टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल बताए जा रहे दो सगे भाइयों सोनू सिंह और मोनू सिंह की गिरफ्तारी के बाद बेगूसराय पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है।
गिरफ्तारी के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद बेगूसराय-खगड़िया रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा रविवार को स्वयं बरियारपुर पहुंचे और जांच की।
डीआईजी ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों, आरोपितों के स्वजन और स्थानीय लोगों से बातचीत कर घटना की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
पहले पुलिस अधिकारियों से ली जानकारी
बरियारपुर जाने से पहले डीआईजी बलिया अनुमंडल पुलिस कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने डीएसपी सुबोध कुमार, थानाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार तथा छापेमारी दल के अन्य अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
इसके बाद गिरफ्तार दोनों आरोपितों सोनू सिंह और मोनू सिंह से भी पूछताछ की। इसके उपरांत डीआईजी पुलिस अधिकारियों के साथ बरियारपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, शनिवार की सुबह बलिया थाना कांड संख्या 343/26 के फरार आरोपित सोनू सिंह और मोनू सिंह को गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि दोनों के पास से हथियार और कारतूस बरामद किए गए।
डीएसपी सुबोध कुमार ने प्रेस वार्ता में कहा था कि गिरफ्तारी के दौरान मोनू सिंह पिस्तौल निकालने का प्रयास कर रहा था, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो को भ्रामक बताया, जिसमें पुलिसकर्मियों पर आरोपित की कमर में जबरन पिस्तौल खोंसने का आरोप लगाया गया है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
हालांकि वीडियो सामने आने के बाद मामला और गर्मा गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने गिरफ्तारी का विरोध नहीं किया था।
लेकिन कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपितों की कमर में पिस्तौल डालने की घटना से लोगों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने डीआईजी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।