मिथिला-अंग की सीमा पर विराजे बाबा हरिगिरि, सप्तकुंड के जल से जलाभिषेक की सालों से चली आ रही परंपरा
मिथिलांचल के बाबा हरिगिरि धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और पौराणिक है, जहां श्रावणी मेले में भक्त जल चढ़ाते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण, रुद्रयामल तंत्र और ...और पढ़ें

बाबा हरिगिरि धाम: प्राचीन शिव मंदिर का पौराणिक महत्व और धार्मिक प्रमाण
संवाद सूत्र, गढ़पुरा (बेगूसराय)। मिथिलांचल की पवित्र धरा पर स्थित बाबा हरिगिरि धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और पौराणिक है। यहां स्थापित स्वयं भू शिव लिंग की श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का फल श्रद्धालुओं को मिल रहा है। श्रावणी मेला के अवसर पर यहां दूर-दूर से भक्त आकर जल अर्पण करते हैं और बाबा से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस शिवलिंग की विशेषता और पौराणिक महत्व के बारे में जानकारी देते हुए गढ़पुरा के विद्वान पंडित दिनेश झा इंदू ने बताया कि भारत धर्म प्रधान देश है। यहां के तीर्थों की महत्ता का वर्णन वेदों और पुराणों में मिलता है।
कुछ धर्म स्थलों का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन उनके प्रमाण शास्त्रों में बिखरे हुए हैं। बाबा हरि गिरि धाम भी उन्हीं में से एक है, जिसकी महत्ता पौराणिक ग्रंथों में प्रमाणित होती है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है उल्लेख:
पंडित इंदू ने कहा कि ब्रह्मवैवर्त पुराण में मंगला देवी का वर्णन है। इसमें कहा गया है कि कमल दल से पूर्ण सरोवर के मध्य मंगला देवी का निवास है। इस कमल दल सरोवर को आज कावर के रूप में जाना जाता है और मंगला देवी को जय मंगला माता कहा जाता है।
इसी पुराण में वर्णन है कि मंगला देवी के दक्षिण दिशा की ओर चंद्रभागा नदी कल-कल छल-छल बहती हुई मुड़ी हुई है।
रुद्रयामल तंत्र और कालिका पुराण का प्रमाण
उन्होंने ने बताया कि इससे भी बड़ा प्रमाण रुद्रयामल तंत्र और कालिका पुराण में मिलता है। पुराणों में वर्णन है कि मिथिला एवं अंग देश की सीमा पर दक्षिणायन चंद्रभागा नदी के तट पर शिव का वास है, जहां उनकी पूजा सप्तकुंड के जल से की जाती है और वहीं त्रिदंडी ऋषियों का निवास है।
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यह देवभूमि सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली है। महाभारत काल में जिसे अंग देश कहा गया, वह आज मुंगेर के नाम से जाना जाता है। मिथिला और अंग देश की सीमा यही क्षेत्र है।
सप्त कुंड और त्रिदंडी ऋषि की समाधि:
इस प्रमाण की पुष्टि बाबा हरिगिरि धाम परिसर में आज भी देखी जा सकती है। मंदिर परिसर में सात कूपों का अस्तित्व मिला है और त्रिदंडी ऋषि की समाधि भी यहां मौजूद है। इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि हजारों वर्ष पहले शास्त्रों में लिखी बातें आज भी यहां जीवित हैं।
आस्था का केंद्र:
यहां पूर्ण विश्वास के साथ आने वाले शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो रही हैं। स्थानीय मान्यता है कि बाबा के ओम नमः शिवाय महामंत्र के जाप से सारे दुख दूर हो जाते हैं।
सावन के महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। शिव भक्त सिमरिया से गंगा जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए बोल बम का नाम जाप करते हुए पहुंचते हैं और बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करते हैं।
यहां आने का सुगम मार्ग:
बाबा हरिगिरि धाम आने के लिए रेल और सड़क मार्ग दोनों सुलभ है। समस्तीपुर-सहरसा रेल खंड पर डॉ. श्रीकृष्ण सिंह नगर गढ़पुरा रेलवे स्टेशन है। जहां से एक किलोमीटर पश्चिम यह धाम स्थित है, जबकि बेगूसराय, खगड़िया, समस्तीपुर, रोसड़ा, हसनपुर से सड़क मार्ग से आने का सुगम रास्ता हैं।