बांका के सुईया पहाड़ पर पत्थर रख पूरी हो रही कांवड़ियों की मनौती; कठिन चढ़ाई अब बनी आस्था का 'मनोकामना पर्वत'
सुल्तानगंज से बाबाधाम जाने वाले कांवड़ियों के लिए कभी कठिन रहा सुईया पहाड़ अब सुगम हो गया है। यह अब 'मनोकामना पहाड़' बन गया है, जहां श्रद्धालु पत्थर र ...और पढ़ें

सुईया पहाड़ पर पत्थरों के ऊपर पत्थर रखकर मनौती मांगते कांवड़िया श्रद्धालु
HighLights
सुईया पहाड़ अब कांवड़ियों के लिए सुगम मार्ग बना।
श्रद्धालु पत्थर रखकर पूरी करते हैं अपनी मनोकामनाएं।
कई भक्तों ने अनुभव साझा किए, इच्छाएं हुई पूरी।
संवाद सहयोगी, चांदन (बांका)। सुल्तानगंज स्थित गंगाधाम से देवघर स्थित बाबाधाम की सुप्रसिद्ध कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूर्व के वर्षों में सबसे कठिन और कष्टदायक पड़ाव 'सुईया पहाड़' माना जाता था। हालांकि, बेहतर सरकारी व्यवस्थाओं और सड़कों के सुदृढ़ीकरण के कारण कांवड़ लेकर चलने वाले भक्तों के लिए यह विकट रास्ता अब बेहद सुगम हो गया है।
सुईया पहाड़ का रास्ता आसान होते ही श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी बदल गया है। अब इस पहाड़ी रास्ते को कांवड़िया बड़े ही भक्ति भाव से 'मनोकामना पहाड़' के रूप में पूजने लगे हैं।
माता वैष्णो देवी की तर्ज पर पत्थरों का टीला बनाकर मांगते हैं मनौती
बीते पांच वर्षों से सुईया पहाड़ पर एक अनोखी परंपरा तेजी से प्रचलित हुई है। यहां अपनी कांवड़ रखकर विश्राम करने वाले कांवड़िया मार्ग किनारे पड़े पत्थरों के ऊपर एक के बाद एक पत्थर रखकर भगवान शिव से अपने सपनों और मन की इच्छाओं को पूरा करने की प्रार्थना करते हैं।
मुख्य रूप से कांवड़िया अपना खुद का पक्का मकान बनाने, नौकरी पाने या परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य की मनोकामना के लिए पत्थरों का छोटा सा घर या टीला बनाते हैं। ठीक इसी तरह की मनौती माता वैष्णो देवी के दर्शन मार्ग में भी श्रद्धालुओं द्वारा मांगी जाती है। बाबाधाम आने वाले शिवभक्त कांवड़ियों का दावा है कि भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनकी ये मनौतियां सचमुच पूरी हो रही हैं।
'बना पांच मंजिला मकान, मिली सरकारी नौकरी'
गोरखपुर से आईं महिला कांवड़िया शांति देवी बम ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि तीन वर्ष पूर्व उन्होंने सुईया पहाड़ पर पांच पत्थर रखकर पांच मंजिला मकान की मनौती मांगी थी। बाबा भोलेनाथ की कृपा से इस वर्ष तक उनका यह सपना पूरा हो गया, इसीलिए वे लगातार तीसरी बार आभार जताने कांवड़ लेकर बाबाधाम जा रही हैं।
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इसी तरह पटना के नरेश बम ने बताया कि उन्होंने यहां अपनी मनचाही नौकरी के लिए प्रार्थना की थी और महज एक साल के भीतर उन्हें अच्छी नौकरी मिल गई।
कांवड़ियों ने साझा किए अनुभव
नेपाल की सुनारी थापा ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पास रहने को अपना पक्का घर नहीं था। साथी कांवड़िया को देखकर उन्होंने भी दो पत्थर रखे थे और आज उनका दो मंजिला मकान बनकर तैयार हो गया है। वहीं दरभंगा की मालती देवी ने बताया कि उनके पोते की तबीयत लगातार खराब रहती थी, यहां पत्थर रखकर बाबा से उसके स्वस्थ होने की प्रार्थना की थी। पिछले दो सालों से उनका पोता पूरी तरह सेहतमंद है।