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    श्रावणी मेले पर बनाएं बेहतरीन वीडियो और रील्स, बिहार सरकार देगी ₹3 लाख तक का इनाम 

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 03:44 PM (GMT+05:30)

    बिहार सरकार ने श्रावणी मेला 2026 को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए 'एक इंफ्लुएंसर की नजर से' अभियान शुरू किया है। ...और पढ़ें

    श्रावणी मेले पर बनाएं बेहतरीन वीडियो और रील्स ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    श्रावणी मेले पर बनाएं बेहतरीन वीडियो और रील्स ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    HighLights

    1. श्रावणी मेला 2026 को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल।

    2. 'एक इंफ्लुएंसर की नजर से' अभियान शुरू, कंटेंट क्रिएटर्स आमंत्रित।

    3. उत्कृष्ट प्रविष्टियों के लिए 3 लाख रुपये तक के पुरस्कार।

    संवाद सहयोगी, अमरपुर (बांका)। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बिहार सरकार ने इस बार नई और महत्वाकांक्षी पहल किया है। पर्यटन विभाग ने श्रावणी मेला 2026 को लेकर 'एक इंफ्लुएंसर की नजर से' अभियान शुरू कर देशभर के कंटेंट क्रिएटर, ट्रैवल ब्लागर, फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर और रील मेकर को मेले की आध्यात्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का आमंत्रण दिया है। 

    सरकार का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों से श्रावणी मेले को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करना है। 

    पर्यटन विभाग की ओर से विज्ञापन जारी 

    पर्यटन विभाग की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार प्रतिभागी श्रावणी मेला से जुड़े दृश्य, कांवड़ यात्रा, मंदिर, लोक संस्कृति, सेवा शिविर, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक परंपराओं को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया है। 

    उत्कृष्ट प्रविष्टियों के लिए प्रथम पुरस्कार तीन लाख, द्वितीय दो लाख, तृतीय एक लाख रुपया, चतुर्थ पुरस्कार दो प्रतिभागियों को 50-50 हजार रुपया तथा पांच प्रतिभागियों को 25-25 हजार रुपया का प्रशंसा पुरस्कार दिया जायेगा। इस पहल का सबसे बड़ा लाभ बांका जिला के इन्फ्लुएंसर्स को मिलने की उम्मीद है। 

    बांका जिले से होकर गुजरता है 55 किमी का रास्ता

    बतातें चलें कि सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा में से लगभग 55 किलोमीटर का मार्ग बांका जिला से होकर गुजरता है। अमरपुर, शंभूगंज और कटोरिया, बेलहर ,चांदन क्षेत्र में लाखों कांवरियों की आस्था, अनुशासन, सेवा शिविर, हर-हर महादेव के उद्घोष और प्राकृतिक सौंदर्य हर वर्ष श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 

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    अब यही दृश्य सोशल मीडिया के जरिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोगों तक पहुंचेगा। 

    धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई गति 

    पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफार्म पर श्रावणी मेला की व्यापक प्रस्तुति से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे बांका के पर्यटन स्थलों, स्थानीय हस्तशिल्प, होटल व्यवसाय, परिवहन, छोटे व्यापारियों और युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे। 

    श्रावणी मेला को आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया से जोड़ने की यह पहल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।

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