बिहार के किसान की बेटी को मिली ₹96 लाख की कोरिया स्कॉलरशिप; गांव के स्कूल से निकल अब विदेश में पढ़ाई करेगी जानू
बांका की किसान बेटी जानू कुमारी को प्रतिष्ठित ग्लोबल कोरिया स्कॉलरशिप मिली है। इसके तहत उन्हें दक्षिण कोरिया में इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर डिग्री क ...और पढ़ें

अमरपुर के सलेमपुर गांव निवासी किसान चंडिका चौधरी की बेटी जानू का चयन; सन मून यूनिवर्सिटी में करेंगी मास्टर डिग्री
HighLights
जानू कुमारी को ₹96 लाख की ग्लोबल कोरिया स्कॉलरशिप मिली।
दक्षिण कोरिया में इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर डिग्री करेंगी।
बांका जिले की पहली छात्रा को मिला यह अवसर।
जागरण संवाददाता, बांका। मेहनत और लगन के दम पर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं। इसे साबित कर दिखाया है बांका जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित सलेमपुर गांव की रहने वाली किसान की बेटी कुमारी जानू ने। जानू का चयन दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित 'ग्लोबल कोरिया स्कॉलरशिप' (GKS 2026) के लिए हुआ है।
इस स्कॉलरशिप के माध्यम से जानू को दक्षिण कोरिया के प्रसिद्ध सन मून विश्वविद्यालय से 'इंटरनेशनल रिलेशंस' (अंतरराष्ट्रीय संबंध) विषय में दो साल की मास्टर डिग्री करने का अवसर मिला है। कोरिया सरकार का शिक्षा मंत्रालय (NIIED) जानू की ट्यूशन फीस, रहने-खाने, स्वास्थ्य बीमा और आने-जाने के हवाई किराए समेत कुल ₹96 लाख (सालाना खर्च) वहन करेगा।
देश भर के 40 मेधावियों में बिहार से केवल दो का चयन
ग्लोबल कोरिया स्कॉलरशिप के लिए आयोजित इस कठिन परीक्षा में देश भर से कुल 40 मेधावी छात्रों का चयन हुआ है, जिसमें बिहार से केवल दो छात्र शामिल हैं। इनमें बांका की जानू कुमारी के अलावा बेगूसराय का एक छात्र शामिल है। बांका जिले के इतिहास में पहली बार किसी छात्र को यह अवसर मिला है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार जानू को 1 सितंबर 2026 से 31 अगस्त 2029 तक छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा। इस दौरान पहले एक साल तक उन्हें कोरियाई भाषा (Korean Language) का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद दो साल का मास्टर डिग्री कोर्स शुरू होगा।
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सीमित संसाधनों के बावजूद पिता ने नहीं रुकने दी बेटी की पढ़ाई
जानू के पिता चंडिका चौधरी और माता रानी चौधरी बेहद साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद पिता ने बेटी के सपनों के बीच कभी तंगी को नहीं आने दिया। चाचा अंबिका चौधरी ने बताया कि जानू बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर रही है।
कुमारी जानू की शुरुआती शिक्षा गांव के ही सलेमपुर हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने शारदा झुनझुनवाला महिला महाविद्यालय (भागलपुर) से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया। स्नातक में अंग्रेजी के साथ राजनीति विज्ञान पढ़ने के दौरान ही उनकी रुचि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जगी।
विदेश में पढ़ाई के साथ-साथ UPSC की करेंगी तैयारी
आर्थिक बाधाओं के कारण जानू किसी बेहतर स्कॉलरशिप की तलाश में थीं, तभी उन्हें जीकेएस परीक्षा के बारे में पता चला और उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यह ऐतिहासिक सफलता हासिल कर ली।
जानू ने बताया कि दक्षिण कोरिया में पढ़ाई के साथ-साथ वह सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी भी जारी रखेंगी, क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करना है। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने वाली जानू अब क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।