रानीगंज थाने में हर साल क्यों आते हैं विदेशी मेहमान? पीपल के पेड़ों पर सज जाता है परिंदों का आशियाना
रानीगंज, अररिया में हर साल हजारों मील दूर से विदेशी प्रवासी पक्षी आते हैं और पुलिस थाना परिसर के पीपल व बरगद के पेड़ों को अपना आशियाना बनाते हैं। यह स ...और पढ़ें

पीपल और बरगद के विशाल पेड़ों पर घोंसला बनाकर बच्चों का पालन-पोषण करते हैं प्रवासी मेहमान, मानसून का देते हैं संकेत
HighLights
विदेशी प्रवासी पक्षी रानीगंज थाना परिसर में हर साल आते हैं।
पीपल और बरगद के पेड़ बनते हैं उनका सुरक्षित आशियाना।
शिकारियों से सुरक्षित रहकर यहां प्रजनन करते हैं और रहते हैं।
संवाद सूत्र, रानीगंज (अररिया)। परिंदे किसी सरहद के मोहताज नहीं होते, उन्हें तो बस उन्मुक्त उड़ान भरनी होती है। यही वजह है कि हजारों मील की दूरी तय कर विदेशी प्रवासी पक्षी हर साल अररिया जिले के रानीगंज पहुंचते हैं। रानीगंज थाना परिसर स्थित बड़े-बड़े पीपल और बरगद के पेड़ इन साइबेरियन पक्षियों के लिए बीते कई वर्षों से पसंदीदा आशियाना बने हुए हैं, जहां वे साल के करीब छह महीने बिताते हैं।
सुबह से शाम तक पक्षियों की सुरीली चहचहाहट से पूरा थाना परिसर गूंजता रहता है, जो यहां आने वाले फरियादियों और स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है।
थाना परिसर बना सुरक्षित ठिकाना, शिकारियों का नहीं रहता डर
स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों के अनुसार, साइबेरियन पक्षी हर साल मानसून के आगमन से ठीक पहले रानीगंज थाना परिसर पहुंचते हैं। घने पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर दूर-दूर तक इन पक्षियों के घोंसलों का संसार नजर आता है। यहां वे न सिर्फ विश्राम करते हैं बल्कि अंडे देकर बच्चों का पालन-पोषण भी करते हैं।
थाना परिसर होने के कारण इन आकाशीय मेहमानों को शिकारियों से पूर्ण सुरक्षा मिलती है, जिससे वे बिना किसी भय के अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।
मानसून के आगमन का संकेत और मौसम के साथ पलायन
जानकारों का मानना है कि इन प्रवासी पक्षियों की गतिविधियां क्षेत्र में मानसून आने से 10 से 15 दिन पहले ही बढ़ जाती हैं। ये आसपास के जलस्रोतों और खेतों से अपने और बच्चों के लिए भोजन जुटाते हैं।
रानीगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि ये पक्षी मानसून से पहले आते हैं और ठंड व गर्मी के चक्र के अनुसार यहां से पलायन कर जाते हैं। पक्षियों की मौजूदगी से परिसर का वातावरण जीवंत रहता है और किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। नगर वृक्ष वाटिका की वनपाल पल्लवी कुमारी के अनुसार, पूर्व में शिकार के कारण इनकी संख्या घटी थी, लेकिन अब सुरक्षित माहौल मिलने से इनकी संख्या फिर बढ़ रही है।